‘बैक पेपरÓ के नियमों को लेकर कालेज प्रशासन से टकराव की स्थिति
प्रयागराज 12 मार्च (आरएनएस)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक यूइंग क्रिश्चियन कालेज में प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में एक विषय में फेल होने पर बैक पेपर लगाए जाने के विरोध में छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। दर्जनों छात्र-छात्राएं बुधवार से बेमियादी धरने पर बैठे हैं और गुरुवार को भी उनका प्रदर्शन जारी रहा। छात्रों ने रात भर कालेज परिसर में ही धरना जारी रखा और सुबह फिर से नारेबाजी व प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि प्रथम सेमेस्टर में बैक पेपर लगाए जाने संबंधी इलाहाबाद विश्वविद्यालय का कोई स्पष्ट नियम नहीं है। चूंकि ईसीसी विश्वविद्यालय का संघटक महाविद्यालय है, इसलिए उसे भी विश्वविद्यालय के नियमों का पालन करना चाहिए।
छात्रों का कहना है कि जब पूरे वर्ष की फीस ली गई है तो केवल छह महीने में ही छात्रों को फेल घोषित करना उचित नहीं है। छात्र-छात्राओं ने मांग की कि यदि बैक पेपर का नियम लागू किया ही जाना है तो उनसे ली गई फीस वापस की जाए। उनका कहना है कि महाविद्यालय प्रशासन की मनमानी के कारण सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार कई छात्र ऐसे हैं जो केवल एक विषय में असफल हुए हैं, लेकिन उन्हें अगले सेमेस्टर में प्रोन्नत नहीं किया जा रहा है, जिससे उनका पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो सकता है। धरने में शामिल छात्रों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कई छात्र संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन देने की बात कही है।
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नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम की संरचना बदली गई- ईसीसी प्रशासन
प्रयागराज। ईसीसी प्रशासन ने छात्रों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम की संरचना बदली गई है। इसके अनुसार विद्यार्थियों को दो मेजर और एक माइनर विषय लेना होता है। प्रशासन का कहना है कि यदि कोई छात्र तीन में से दो विषयों में असफल हो जाता है तो नियमानुसार उसे अगले सेमेस्टर में प्रोन्नत नहीं किया जा सकता।
कालेज प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था नई शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुसार लागू की गई है और इसमें किसी प्रकार की मनमानी नहीं की जा रही है।
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