रायपुर, 12 मार्च(आरएनएस)। मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े एक अहम मामले में विशेष न्यायालय ने सख्त फैसला सुनाया है। विशेष दांडिक प्रकरण (एनडीपीएस) क्रमांक 148/2021 में सुनवाई के बाद अदालत ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 15-15 वर्ष के कठोर कारावास और 1 लाख 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) रायपुर पंकज कुमार सिन्हा की अदालत ने सुनाया।अदालत में पेश साक्ष्यों के अनुसार पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक कार से बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक आरोपियों के आधिपत्य वाली होंडा इंडिगो कार क्रमांक सीजी-04/एचए-5540 से व्यावसायिक मात्रा में कुल 61 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया था। मामले की जांच और सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आरोप संदेह से परे प्रमाणित मानते हुए दोषी करार दिया।अदालत ने शादाब खान पिता नसीमुद्दीन खान और घनश्याम मेहर पिता मधुसूदन को स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 (एनडीपीएस) की धारा 20 (ड्ढ) (द्बद्ब) (ष्ट) के तहत दोषी पाया। दोनों आरोपियों को 15-15 वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ प्रत्येक पर 1 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि आरोपी जुर्माना राशि जमा नहीं करते हैं तो उन्हें अतिरिक्त तीन-तीन वर्ष का कठोर कारावास भुगतना होगा।सजा सुनाए जाने से पहले आरोपियों के अधिवक्ता ने अदालत से सजा में उदारता बरतने की मांग करते हुए कहा कि यह उनके मुवक्किलों का पहला प्रमाणित अपराध है। हालांकि अदालत ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया कि 61 किलोग्राम गांजाजैसी व्यावसायिक मात्रा में मादक पदार्थ की बरामदगी गंभीर अपराध है और इसमें उदारता का कोई आधार नहीं बनता।न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि जांच और सुनवाई के दौरान आरोपियों द्वारा न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत सजा में समायोजित किया जाएगा। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी समाज के लिए गंभीर खतरा है और ऐसे अपराधों में कड़ी सजा आवश्यक है।
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