तेहरान ,13 मार्च । पश्चिम एशिया इस समय गंभीर तनाव के दौर से गुजर रहा है। पिछले दो हफ्तों से जारी भीषण सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालात तब और गंभीर हो गए जब ईरान ने चेतावनी दी कि यदि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ तो वह पूरे क्षेत्र के तेल और गैस ढांचे को निशाना बना सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक तेल बाजार में हलचल बढ़ गई और आपूर्ति बाधित होने की आशंका गहरा गई।
इसी बढ़ते संकट के बीच अमेरिका ने अचानक रुख बदलते हुए कुछ देशों को रूसी तेल खरीदने के लिए अस्थायी मंजूरी देने का फैसला किया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि 12 मार्च को सुबह 12:01 बजे या उससे पहले जहाजों पर लदे रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े लेनदेन की अनुमति दी गई है। यह आदेश 11 अप्रैल तक प्रभावी रहेगा।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब पिछले 14 दिनों से अमेरिका और इजऱाइल की ओर से ईरान पर हमले तथा इसके जवाब में ईरान द्वारा इजऱाइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए जा रहे हमलों के कारण पूरे पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने और तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के जल्द खत्म होने की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका भारत को भी इसी तरह की छूट दे चुका है। 5 मार्च को अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की विशेष अनुमति दी थी, जिसके तहत भारत रूस से तेल खरीद सकता है। ट्रंप प्रशासन ने कहा था कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए लिया गया है।
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