भोपाल 13 मार्च (आरएनएस)। भोपाल नगर निगम प्रशासन में उस समय हड़कंप मच गया, जब लोकायुक्त की टीम ने निगम की सबसे महत्वपूर्ण कंप्यूटर शाखा पर एक साथ धावा बोल दिया। यह कार्रवाई शुक्रवार को फतेहगढ़ स्थित पुराने कार्यालय और लिंक रोड नंबर-2 पर बने नए मुख्य भवन के कार्यालय में एक साथ शुरू की गई।
लोकायुक्त की दो अलग-अलग टीमें दोनों ही स्थानों पर डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही हैं। सूत्रो की मानों तो लोकायुक्त को फर्जी बिल बनाकर करोड़ों का घोटाला करने की शिकायत मिली थी। उसके बाद नगर निगम के सर्वर रूम को लोकायुक्त ने अपने कब्जे में लिया है।
एसपी लोकायुक्त दुर्गेश कुमार राठौर ने बताया कि मुखबिर के द्वारा बताया गया था कि नगर निगम की वित्तीय शाखा में एसएपी सॉफ्टवेयर के माध्यम से फर्जी बिल बनाकर भुगतान किया गया है। शिकायत यह भी मिली कि दफ्तर में कई वित्तीय अनियमितता भी है। शिकायत का सत्यापन करवाया गया उसके बाद मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया हैं। एसपी लोकायुक्त ने बताया कि मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा होने के चलते न्यायालय से वारंट लेकर नगर निगम द्वारा जिस हार्ड डिस्क में डेटा रखा गया था उसको जब्त कर जांच की जा रही हैं।
छापेमारी के दौरान लोकायुक्त टीम ने पिछले करीब दस वर्षों से जुड़े रिकॉर्ड और फाइलों को अपने कब्जे में लिया है। इसके साथ ही भुगतान से जुड़े एसएपी सॉफ्टवेयर का डाटा भी जब्त किया गया है। जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों और डिजिटल डाटा का विश्लेषण कर यह पता लगाएगी कि किन-किन कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया और वास्तव में वे काम हुए भी थे या नहीं। साथ ही इनमें कौन कौन सी फर्म और अधिकारियों की मिलीभगत थी।

