सोहावल-अयोध्या 15 मार्च (आरएनएस)। शनिवार को सुचित्तागंज बाजार के व्यापारियों ने बाजार स्थित दुर्गा मंदिर से ज्वाला माई तक भव्य स्वागत यात्रा निकाली। खाटू श्याम बाबा को हारे का सहारा कहा जाता है। क्योंकि उनकी कहानी में एक ऐसा पहलू है कि जो हर हारने वाले या संकट में फंसे व्यक्ति को आशा देता है
महाभारत युद्ध से पहले बर्बरीक (खाटू श्याम) ने भगवान कृष्ण से कहा था कि वे सिर्फ तीन बाण से ही युद्ध जीत सकते हैं। कृष्ण ने उनकी शक्ति को परखने के लिए एक पेड़ के नीचे खड़े होकर कहा कि अगर बर्बरीक तीन बाणों से पेड़ के सभी पत्तों को छेद दे, तो वे युद्ध में शामिल हो सकते हैं। बर्बरीक ने पहला बाण चलाया, जो पेड़ के हर पत्ते को छेदता हुआ कृष्ण के पैरों के पास आकर रुका। कृष्ण ने अपने पैर उठा लिए, और बाण वहीं रुक गया। इससे कृष्णा समझ गए कि बर्बरीक की शक्ति इतनी बड़ी है कि युद्ध में वे किसी एक पक्ष को नहीं, बल्कि दोनों पक्षों को जितवा सकते हैं। इसलिए कृष्ण ने उनका शीश मांग लिया, ताकि युद्ध की संतुलन बिगड़े नहीं। बर्बरीक ने अपना शीश दे दिया और कृष्ण ने उन्हें कलियुग में श्याम के रूप में पूजे जाने का वरदान दिया। बर्बरीक ने अपनी जान और शक्ति का बलिदान दिया। लेकिन वे जानते थे कि उनका उद्देश्य पूरा नहीं होगा अगर युद्ध में वे शामिल होते।आशा का प्रतीक जो लोग जीवन में हारते हैं, संकट में होते हैं, उन्हें लगता है कि श्याम बाबा उनकी सुनेंगे और सहारा देंगे। क्योंकि उन्होंने खुद सबसे बड़ी हार (शीश का बलिदान) स्वीकार की थी।भक्तों की मान्यता।खाटू श्याम के दरबार में जो भी हारकर आता है। उसे लगता है कि बाबा उसका साथ देंगे और उसकी जीत का रास्ता खोलेंगे। इसलिए हारे का सहारा नाम उनकी वीरता, बलिदान और संकट में फंसे लोगों के लिए आशा के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।इस शोभा यात्रा में सरोज जायसवाल, राकेश जयसवाल, गंगा राम गुप्ता, सत्येंद्र गुप्ता, वीरभद्र गुप्ता, अरुण कुमार कसौधन उर्फ बब्लू गुप्ता आदि सहित बड़ी संख्या में खाटू श्याम बाबा के भक्त मौजूद रहे।

