रायपुर 17 मार्च (आरएनएस) छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य आरोपी निर्भय कुमार साहू को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी के साथ ही करोड़ों रुपये के इस घोटाले की परतें खुलने की उम्मीद और तेज हो गई है।
निर्भय कुमार साहू, जो उस समय अभनपुर में अनुविभागीय अधिकारी और भू-अर्जन के सक्षम प्राधिकारी थे, पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अधीनस्थ कर्मचारियों और जमीन कारोबारियों के साथ मिलकर सुनियोजित साजिश रची। जांच में सामने आया है कि ग्राम नायकबांधा, उगेतरा, उरला, भेलवाडीह और टोकरो की जमीनों को बैक डेट में अलग-अलग हिस्सों में विभाजित कर वास्तविक से कई गुना अधिक मुआवजा वितरित किया गया।
इतना ही नहीं, पहले से अधिग्रहित नायकबांधा जलाशय की भूमि को भी दोबारा भारतमाला परियोजना के नाम पर अधिग्रहित दिखाकर मुआवजा जारी किया गया, जिससे शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं 409, 467, 468, 471, 420 और 120बी के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी ने उच्चतम न्यायालय में जमानत की याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद विशेष न्यायालय से स्थायी गिरफ्तारी वारंट और उद्घोषणा जारी की गई थी, लेकिन आरोपी लगातार फरार चल रहा था। जांच एजेंसियां उसकी तलाश में लगातार जुटी हुई थीं।
अब गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने विशेष न्यायालय रायपुर से 17 मार्च से 30 मार्च तक की रिमांड हासिल की है, जिसमें आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और घोटाले की गहराई तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।
यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि बड़े आर्थिक अपराधों में शामिल आरोपियों के खिलाफ कानून का शिकंजा कसता जा रहा है और अब इस घोटाले में शामिल अन्य चेहरों के सामने आने की संभावना भी बढ़ गई है।

