हुगली 18 मार्च (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने एक तरह से थोक में अपने विधायकों का पत्ता काटा है और नए चेहरों को जगह दी है। महनगर कोलकाता से लेकर तमाम जिलों में क्रमशा हालात एक जैसे हैं। लेकिन अगर बात एक वेहद महत्वपूर्ण जिला हुगली की करे तो यहां से पार्टी ने अपने 6 विधायकों का पत्ता काट दिया है। श्रीरामपुर के चार बार के विधायक सुदीप्त रॉय, चुंचुड़ा के विधायक असित मजूमदार, सप्तग्राम के विधायक तपन दासगुप्ता, उत्तरपाड़ा विधायक कंचन मलिक, बलागढ़ विधायक मनोरंजन व्यापारी व पांडुआ विधायक रत्ना दे नाग जैसे चेहरों का पार्टी ने पत्ता काट उन्हें टिकट नहीं दिया है। ऐसे में भले ही तृणमूल कुछ भी कहे लेकिन आमजनता में यह कहा जा रहा है कि, पार्टी ने बेहतर काम किया है और उनलोगों का पत्ता काटा है जो लोगों के काम से दूर रह रहें थे। बहरहाल सप्तग्राम में तपन दासगुप्ता की जगह फुटबॉलर विदेश बोस, चुंचुड़ा से युवा नेता देवांशु भट्टाचार्य को टिकट दिया है। असित मजूमदार ने इसे पार्टी का फैसला बताते हुए कहा कि युवा नेतृत्व को मौका देना जरूरी है और उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने का संकेत भी दिया। विधायक असित मजूमदार जिन्होंने पिछले लगातार तीन कार्यकालों से यह सीट जीती थी। टिकट न मिलने पर, असित ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। गहरी निराशा के बीच, उन्होंने यहां तक संकेत दिया कि वे ‘राजनीतिक संन्यासÓ ले लेंगे। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा, मैं अब राजनीति नहीं करुंगा। मैंने राजनीतिक जीवन से विराम ले लिया है। इधर बता दे कि सुदीप्त रॉय की जगह श्रीरामपुर सीट से पार्टी प्रवक्ता तन्मय घोष को उम्मीदवार बनाया गया है। उत्तरपाड़ा से इस बार शीर्षान्य बनर्जी को, बलागढ़ में मनोरंजन व्यापारी की जगह रंजन धारा को टिकट दिया गया है। पांडुआ से रत्ना दे नाग की जगह समीर चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया गया है। रत्ना ने पार्टी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि वह घोषित उम्मीदवार के लिए प्रचार करेंगी।
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