भिलाई,19 मार्च (आरएनएस)। आज प्रात: हिंदू नववर्ष गुढीपाडवा का पर्व हर्ष उल्हास के साथ मनाया गया श्री संत शिरोमणी नामदेव महाराज विठ्ठल रखुमाई मंदिर प्रात: प्रतिमा सुंदर फुलो से सजाया गया न मंदिर में प्रतिमा नये वस्त्र जल अभिषेक पूजा अर्चना फुल माला फलफुल मिठाई प्रसाद चडाकर भेट की भगवान से आशीर्वाद लिया गया इस गुडी पर्व के बारे मे उषा प्रशांत क्षीरसागर नै जानकारी दी गुड़ी पड़वा दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘गुड़ी और ‘पड़वा। गुड़ी का अर्थ है विजय ध्वज या जीत का प्रतीक। पड़वा का अर्थ है प्रतिपदा अर्थात् महीने का पहला दिन। महाराष्ट्र में इस दिन घर के बाहर ‘गुड़ी स्थापित की जाती है। गुड़ी एक लम्बे बाँस या लकड़ी के डंडे पर रेशमी कपड़ा बाँधकर बनाई जाती है। इसके ऊपर चाँदी या ताँबे का कलश रखा जाता है और उसके साथ नीम की पत्तियाँ, आम की टहनियाँ तथा फूल मालायें लगाये जाते हैं। यह गुड़ी विजय और समृद्धि का प्रतीक होती है। माना जाता है कि इसे घर के बाहर ऊँचाई पर लगाने से घर में सुख शांति आती है और नकारात्मक शक्तियाँ दूर रहती है।गुड़ी पड़वा से जुड़ी कई कथायें प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार यह पर्व भगवान राम की रावण पर विजय और अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है। विजय के प्रतीक के रूप में लोगों ने अपने घरों पर ध्वज लगाये, जो आगे चलकर ‘गुड़ी के रूप में प्रसिद्ध हो गया। एक अन्य मान्यता के अनुसार यह दिन मराठा साम्राज्य की विजय और गौरव का भी प्रतीक है। जब मराठा योद्धाओं ने युद्ध में विजय प्राप्त की, तो विजय के प्रतीक के रूप में गुड़ी फहराई जाती थी। इस दिन गुड़ी की पूजा के पश्चात् नीम की पत्तियाँ और गुड़ प्रसाद के रूप में खाने की भी परम्परा है। इसका प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि जीवन में मिठास और कड़वाहट दोनों होते हैं, इसलिए हमें हर परिस्थिति को संतुलन और धैर्य के साथ स्वीकार करना चाहिए।भारत के विभिन्न राज्यों में भी इस दिन को नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। आन्ध्रप्रदेश और तेलांगना में इसे ‘उगादी कहा जाता है। कर्नाटक में भी इसे ‘उगादी के रूप में मनाया जाता है। कश्मीर में इसे ‘नवरेह कहा जाता है। सिन्धी समुदाय में यह पर्व ‘चेतीचाँद के रूप में मनाया जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत की विविधता के बावजूद सांस्कृतिक मूल भावना एक ही है, नये वर्ष का स्वागत आशा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।. इस नवरात्री नव्या वर्ष गुढीपाडवा के अवसर पर प्रशांत उषा क्षीरसागर ओम पीयुष क्षीरसागर बधाई शुभकामनादी
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