कोलकाता 20 मार्च (आरएनएस)। विधानसभा चुनाव में तृणमूल ने अपने जिन 74 विधायकों को इस दफे टिकट नहीं दिया है। ऐसे में तमाम विधायकों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। हालात तो यह है कि, राज्य का शायद ही ऐसा कोई जिला नहीं बचा है, जहां से सड़कों पर खुलेआम विरोध प्रदर्शन की खबरें नहीं आ रही हों। जहां जिस उम्मीदवार को टिकट मिला है, उसके समर्थक और विरोधी आपस में ही भिडऩे को तैयार दिख रहे हैं, कई जगहों पर तो दंगे जैसी स्थिति दिखने लगी है। जिन 74 विधायकों को इस दफे टिकट नहीं मिला है उनमें नामचीन लोगों में पार्थ चट्टोपाध्याय, डॉ सुदीप्तो रॉय, माणिक भट्टाचार्य, जीवन कृष्ण साहा, डॉ रत्ना दे नाग, असित मजूमदार, मनोज तिवारी, विवेक गुप्ता, कृष्णेन्दू नारायण चौधरी, परेश पाल, तपन दास गुप्ता, मनोरंजन व्यापारी, कल्याण घोष, साबित्री मित्रा, कंचन मल्लिक और चिरंजीत चक्रवर्ती शामिल हैं।
टीएमसी टिकट से वंचित फेहरिस्त में चर्चित शोवन चटर्जी और वैशाखी बनर्जी का भी नाम शामिल है। जिनके नामों को लेकर चर्चा व उत्सुकता दोनों ही थी। इसके अलावा सीपीएम से टीएमसी में आये प्रतिकुर रहमान, बीजेपी से टीएमसी में आई पर्णो मित्रा, पार्टी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती, ऋज्जु दत्तो, सुदीप्ता बख्शी, श्रावन्ति चटर्जी, इमन चक्रवर्ती और परमब्रत चट्टोपाध्याय का नाम शामिल है जिन्हें टिकट मिलने की पूरी संभावना थी। 15 विधायकों का जिनका चुनाव क्षेत्र बदला गया है उनमें रत्ना चटोपाध्याय को बेहला पूर्व से बेहला पश्चिम भेजा गया है। यह शोवन चटर्जी की विवाहिता हैं और पति पत्नी में दूरी व अलगाव की वजह वैशाखी बनर्जी ही हैं। शोभन देव चट्टोपाध्याय को खरदह से बालीगंज, पूर्व आईपीएस हुमायूं कबीर को डेबरा से डोमकल और शौकत मोल्ला को कैनिंग से भांगड़ भेजा गया है। कैनिंग और भांगड़ दोनों ही जगह विरोध प्रदर्शन बेकाबू है।

