नई दिल्ली ,23 मार्च । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान, अमेरिका तथा इजरायल के बीच संभावित लंबी जंग की आशंकाओं ने सोमवार को वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट ला दी। एक दिन पहले संभलने की कोशिश के बाद बाजार फिर दबाव में आ गए और भारत समेत दुनिया भर के इक्विटी मार्केट्स में तेज बिकवाली देखने को मिली।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसका असर यह रहा कि घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक क्चस्श्व स्द्गठ्ठह्यद्ग& और हृद्बद्घह्ल4 50 में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव साफ नजर आया।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1387.55 अंकों (1.86त्न) की गिरावट के साथ 73,145.41 पर और निफ्टी 423.35 अंकों (1.83त्न) की गिरावट के साथ 22,691.15 पर कारोबार करता दिखा। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स 72,977.34 और निफ्टी 22,634.55 तक फिसल गए थे।
निवेशकों की दौलत में भारी गिरावट
बाजार में इस तेज गिरावट के चलते क्चस्श्व पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 8.15 लाख करोड़ घट गया। 20 मार्च को जहां कुल मार्केट कैप 4.29 लाख करोड़ था, वहीं 23 मार्च को बाजार खुलते ही यह घटकर 4.20 लाख करोड़ रह गया।
क्यों मची है बाजार में तबाही?
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट का तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का 48 घंटे का अल्टीमेटम है। ट्रम्प ने ईरान को ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुजÓ खोलने की चेतावनी दी है, वरना उसके ऊर्जा ठिकानों को तबाह करने की धमकी दी है। इस खबर ने ग्लोबल सप्लाई चेन को लेकर डर पैदा कर दिया है, जिससे कच्चा तेल (ङ्खञ्जढ्ढ ष्टह्म्ह्वस्रद्ग) $100 के करीब और ब्रेंट क्रूड $112.17 के पार पहुंच गया है।
स्नढ्ढढ्ढ की आक्रामक बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (स्नढ्ढढ्ढ) ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। पिछले 16 कारोबारी दिनों में उन्होंने करीब 1 लाख करोड़ की शुद्ध बिकवाली की है, जो बाजार की कमजोरी का बड़ा कारण बनी।
सेंसेक्स के सभी शेयर लाल निशान में
सेंसेक्स के सभी 30 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा दबाव ञ्जड्डह्लड्ड स्ह्लद्गद्गद्य, रूड्डद्धद्बठ्ठस्रह्म्ड्ड & रूड्डद्धद्बठ्ठस्रह्म्ड्ड और ॥ष्ठस्नष्ट क्चड्डठ्ठद्म के शेयरों पर देखा गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
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