मुंबई ,23 मार्च । ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी भीषण जंग का खौफनाक असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इस वैश्विक तनाव के कारण दलाल स्ट्रीट में कोहराम मचा हुआ है। पिछले एक हफ्ते के भीतर ही भारतीय शेयर बाजार से निवेशकों के करीब 34 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए हैं। इस भारी उथल-पुथल के बीच देश की टॉप 10 में शामिल 5 दिग्गज कंपनियों को सबसे तगड़ा झटका लगा है, जिससे निवेशकों की करीब 1,02,771.87 करोड़ रुपये की गाढ़ी कमाई पल भर में साफ हो गई है।
॥ष्ठस्नष्ट बैंक को लगा सबसे तगड़ा झटका, स्क्चढ्ढ ने कराई बंपर कमाई
बाजार में मची इस भारी तबाही का सबसे बड़ा दंश बैंकिंग सेक्टर, खासकर देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी (॥ष्ठस्नष्ट) ने झेला है। एक तरफ जहां बाजार में युद्ध की टेंशन थी, वहीं दूसरी तरफ एचडीएफसी बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस दोहरी मार के कारण पिछले हफ्ते बैंक का मार्केट कैप 56,124.48 करोड़ रुपये धड़ाम से नीचे गिर गया। इसके ठीक उलट, सरकारी क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक (स्क्चढ्ढ) ने इस गिरते बाजार में भी निवेशकों की झोली भर दी। एसबीआई के मार्केट कैप में 10,707.52 करोड़ रुपये का शानदार इजाफा हुआ है, जो यह दर्शाता है कि संकट के समय में निवेशक प्राइवेट के बजाय सरकारी बैंकों पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।
इन बड़ी कंपनियों का भी मार्केट कैप हुआ धड़ाम
एचडीएफसी बैंक के अलावा अन्य कई दिग्गज कंपनियों के निवेशकों को भी खून के आंसू रोने पड़े हैं। एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर को 18,009.62 करोड़ रुपये की भारी चपत लगी है। इसी तरह बजाज फाइनेंस को 15,338.42 करोड़ रुपये, आईटी दिग्गज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (ञ्जष्टस्) को 7,127.63 करोड़ रुपये और आईसीआईसीआई बैंक को 6,171.72 करोड़ रुपये का भारी भरकम नुकसान उठाना पड़ा है। इन दिग्गज कंपनियों के आंकड़ों ने बाजार में खौफ का माहौल बना दिया है।
22 महीने की सबसे भयंकर गिरावट के बाद लौटी हल्की हरियाली
अगर पिछले हफ्ते के आंकड़ों पर नजर डालें, तो बाजार के आखिरी कारोबारी दिन निवेशकों को थोड़ी राहत जरूर मिली। आखिरी दिन सेंसेक्स 325.72 अंक चढ़कर और निफ्टी 112.35 अंक की बढ़त के साथ हरे निशान पर बंद हुआ। लेकिन इससे ठीक एक दिन पहले बाजार ने पिछले 22 महीनों की सबसे खौफनाक गिरावट का सामना किया था। बड़ी कंपनियों के मार्केट कैप में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की इस सेंधमारी ने स्पष्ट कर दिया है कि मिडिल ईस्ट में जारी इस महायुद्ध का भारतीय बाजार पर आगे भी गहरा और डरावना असर देखने को मिल सकता है।
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