वॉङ्क्षशगटन ,23 मार्च । मिडिल ईस्ट में जारी भयंकर तनाव और अमेरिका-इजरायल के साथ सीधे टकराव के बीच ईरान ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने दुनिया के सबसे अहम और व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक ‘होर्मुज स्ट्रेटÓ (होर्मुज जलडमरूमध्य) पर अपनी स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यह समुद्री रास्ता केवल उन जहाजों के लिए खुला है, जिनका उसके दुश्मनों (यानी अमेरिका और इजरायल) से कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल, इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खुली धमकी दी थी कि अगर 48 घंटों के भीतर इस जलमार्ग को पूरी तरह से नहीं खोला गया, तो अमेरिका सीधे तौर पर ईरान के बिजली संयंत्रों को अपना निशाना बनाएगा।
दुश्मनों के जहाजों की ‘नो एंट्रीÓ, लेकिन कूटनीति के खुले रखे रास्ते
संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (ढ्ढरूह्र) में ईरान के प्रतिनिधि और ब्रिटेन में राजदूत रह चुके अली मौसावी ने एक चीनी न्यूज एजेंसी को दिए विशेष साक्षात्कार में यह अहम बयान दिया है। मौसावी ने स्पष्ट किया कि तेहरान खाड़ी क्षेत्र में नाविकों की सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए आईएमओ के साथ सहयोग जारी रखेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जो व्यापारिक जहाज ईरान के दुश्मनों से ताल्लुक नहीं रखते हैं, वे तेहरान के साथ सुरक्षा व्यवस्थाओं का समन्वय करके इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजर सकते हैं। मौसावी ने यह भी कहा कि ईरान की पहली प्राथमिकता कूटनीति ही बनी हुई है, लेकिन इससे ज्यादा जरूरी आक्रामकता का पूरी तरह से खत्म होना और आपसी विश्वास का कायम होना है।
दुनिया भर में गहराया भयंकर ऊर्जा संकट का खतरा
होर्मुज स्ट्रेट में उपजे इस मौजूदा संकट का ठीकरा ईरान ने सीधे तौर पर इजरायल और अमेरिका के सिर फोड़ा है। मौसावी का सीधा आरोप है कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले ही इस पूरी तनावपूर्ण स्थिति की असली जड़ हैं। आपको बता दें कि इस महायुद्ध के दौरान ईरानी हमलों के खौफ से दुनिया भर के अधिकांश व्यापारिक जहाज इस संकरे जलमार्ग से गुजरने से कतरा रहे हैं। यह स्थिति पूरी दुनिया के लिए इसलिए भी बेहद डराने वाली है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से ही वैश्विक तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (रुहृत्र) की कुल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस रास्ते के बाधित होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर एक भयंकर ऊर्जा संकट गहराने का बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
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