आज होगा लोक आस्था के महापर्व का समापन
संदीप यादव
कोलकाता 24 मार्च (आरएनएस)। देश के विभिन्न जगहों सहित महानगर कोलकाता ही नहीं बंगाल के ताम जगहों पर व्रतियों व श्रद्धालुओं ने आज दोपहर बाद अस्ताचलगामी सूर्य को चैती छठ का पहला अघ्र्य प्रदान किया। अगर बात बंगाल की करे तो इस साल भी भारी संख्या में श्रद्धालुओं को गंगाघाट सहित नदी व तालाबों के किनारे छठ करते हुए देखा गया। लोक आस्था के महापर्व चैती छठ पूजा पर आज महानगर कोलकाता सहित हावड़ा, हुगली, नदिया की बात छोड़ दे तो उत्तर दिनाजपुर व दक्षिण दिनाजपुर जैसे ग्राम अंचलों में छठ पूजा के प्रथम दिन अस्ताचलगामी सूर्य को छठ का पहला अघ्र्य प्रदान किया गया। कोलकाता का बाबूघाट, प्रिंसेप घाट, दही घाट हो या फिर सूर्यनामघाट व अहिरीटोला जैसे गंगा घाटों में श्रद्धालुओं ने छठ पूजन किया। अस्ताचलगामी सूर्य को छठ का पहला अघ्र्य प्रदान किया। गार्डेनरीच के सूर्यनाम घाट पर जन आस्था का सैलाब उमड़ा। पुलिस वाले भी हैरत में थे कि चैत्र छठ भी यहां इतने श्रद्धालु उपस्थित थे। आज गंगा घाटों पर व्रती महिलाओं ने केले का घवद सहित फल-फूल के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य प्रदान किया। इधर उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, माल्दा, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर सहित दार्जिलिंग के जिलों में चैती छठ पर उल्लास रहा। आज तोर्षा नदी, महानंदा नदी सहित घाटों पर डूबते हुए सूर्य को अघ्र्य दिया गया। वहीं आज (बुधवार) सुबह उगते सूर्य को अघ्र्य देने के साथ ही छठ महापर्व का समापन होगा। इसके लिए नहाए-खाए के बाद छठ व्रती महिलाएं 36 घंटे से अधिक समय तक उपवास रहकर सूर्य की उपासना करती हैं।इधर कोलकाता पुलिस द्वारा महानगर में पर्व को लेकर सुरक्षा व्यवस्था की पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जबकि नगर निगम ने घाटों पर लाइट, साफ-सफाई और माइकिंग आदि की व्यवस्था भी दिखी। बहरहाल इंटरनेट के इस दौर में जन आस्था सिर चढ़कर बोलती रही। गंगा घाटों में छठ मईया की शान में गीत और सोहर सभी को मंत्र मुग्ध करते रहें। उल्लेखनीय है कि छठ पूजा साल में दो बार किया जाता है। एक तो चैत्र के महीने में यानी अप्रैल के महीने में और दूसरा कार्तिक के महीने में यानी अक्टूबर- नवंबर के महीने में मनाया जाता है। बहरहाल उक्त खबर के लिखे जाने तक व्रतियों को गंगाघाटों से वापस आते देखा गया व रास्ता घाट छठी मईया के गीत व सोहर से गुलजार रहे।
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