कार्रवाई के अभाव से बढ़ी मरीजों की चिंता
सुल्तानपुर 25 मार्च (आरएनएस)। जनपद के स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज में तैनात दर्जनों चिकित्सकों द्वारा कथित रूप से प्राइवेट प्रैक्टिस किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि कई चिकित्सक ओपीडी समय के दौरान भी अपने निजी नर्सिंग होम और क्लीनिक पर मरीज देख रहे हैं, जिससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहा है। स्थानीय लोगों और मरीजों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को या तो लंबा इंतजार करना पड़ता है या फिर उन्हें डॉक्टर के निजी क्लीनिक का रुख करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह स्थिति खासकर गरीब और ग्रामीण मरीजों के लिए बेहद परेशानी भरी साबित हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, नगर के विभिन्न मोहल्लों में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के निजी क्लीनिकों के बोर्ड खुलेआम लगे हुए हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पर जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं। मेडिकल कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य डॉ. प्रियंका वर्मा की कार्यशैली भी अब चर्चा के केंद्र में है। लोगों का आरोप है कि उनके स्तर से सख्त कार्रवाई न होने के कारण चिकित्सकों के हौसले बुलंद हैं। हालांकि, इस मामले में कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इधर, जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज में विलय के बाद स्थिति और जटिल हो गई है। पहले जहां जिला अस्पताल में कुछ हद तक व्यवस्थाएं नियंत्रित थीं, वहीं अब मरीजों को बेहतर इलाज के लिए निजी संस्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है। आशंका जताई जा रही है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में सरकारी अस्पतालों में मुफ्त या सस्ती चिकित्सा सुविधा का लाभ लेना मुश्किल हो जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आम जनता का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से उठ सकता है। जरूरत है कि उच्च स्तर से जांच कर दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों को बेहतर और सुलभ इलाज मिल सके।
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