गोरखपुर, । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि वर्ष 2017 के बाद बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप बीते वर्षों में महिला श्रम भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि महिला श्रम भागीदारी का प्रतिशत लगभग 12 से बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जो समाज में महिलाओं की बढ़ती सुरक्षा और आत्मविश्वास का संकेत है।मुख्यमंत्री बुधवार को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 144 शैय्या क्षमता वाले बालिका छात्रावास के भूमि पूजन एवं शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह छात्रावास विद्युत प्रसारण निगम द्वारा सामाजिक उत्तरदायित्व निधि के अंतर्गत बनाया जाएगा, जिस पर लगभग 13.67 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय में 4.67 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित साइबर फोरेंसिक अनुसंधान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया तथा उत्कृष्ट अनुसंधान पुरस्कार भी वितरित किए। साथ ही एक पुस्तिका का भी अनावरण किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा और स्वावलंबन सुनिश्चित करने के लिए उन्हें उपयुक्त सुविधाएं उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के प्रमुख नगरों में कामकाजी महिलाओं के लिए श्रमजीवी महिला छात्रावासों का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज में सुरक्षा का वास्तविक मानक यह होता है कि महिलाएं बिना भय के घर से बाहर निकलकर शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में महिला सुरक्षा एक बड़ी चुनौती थी और अनेक परिवार भय के कारण बेटियों को प्रदेश से बाहर पढऩे भेजते थे। आज प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बेटियां अपने घर से ही शिक्षा और रोजगार के लिए निकल रही हैं, जो सकारात्मक परिवर्तन का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब समाज में बेटा-बेटी के बीच भेदभाव समाप्त होगा, तभी विकास की गति कई गुना बढ़ेगी और समाज में स्थायित्व आएगा।मुख्यमंत्री ने वर्तमान समय में फोरेंसिक विज्ञान की बढ़ती आवश्यकता का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल दो उच्च श्रेणी की फोरेंसिक प्रयोगशालाएं थीं, जबकि वर्तमान में उनकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है और छह नई प्रयोगशालाएं निर्माणाधीन हैं। उन्होंने बताया कि सभी 75 जनपदों में मोबाइल फोरेंसिक प्रयोगशालाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे अपराधों की जांच में तेजी आई है और दोषियों को सजा दिलाने में सहायता मिल रही है।उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश में केवल दो साइबर थाने थे, जबकि वर्तमान में सभी जनपदों में साइबर थाने स्थापित किए जा चुके हैं तथा थानों में साइबर सहायता कक्ष भी बनाए गए हैं। इससे साइबर अपराधों पर नियंत्रण करने में सहायता मिल रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की बड़ी जनसंख्या को मानव संसाधन के रूप में विकसित करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। युवाओं को कौशल, नवाचार और तकनीकी शिक्षा से जोड़कर उन्हें रोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की बड़ी संख्या रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है तथा आधारभूत संरचना के विकास से प्रदेश औद्योगिक प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ा है।कार्यक्रम में प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय प्रदेश का पहला तकनीकी विश्वविद्यालय है जिसने मान्यता मूल्यांकन प्राप्त किया। सांसद रविकिशन ने प्रदेश में हुए विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने शिक्षा और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में नई दिशा प्राप्त की है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी दी।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने साइबर फोरेंसिक अनुसंधान प्रयोगशाला का निरीक्षण किया तथा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन कर विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए मॉडलों की सराहना की। साथ ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बालिका छात्रावास निर्माण के लिए भूमि पूजन कर शिलान्यास पट्टिका का अनावरण किया और पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री, जनप्रतिनिधि, विश्वविद्यालय के अधिकारी तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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