सारंगढ़ बिलाईगढ़ 24 मार्च (आरएनएस) किसानों को आय का नया जरिया देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है, जहां 50 किसानों ने आधुनिक मधुमक्खी पालन की तकनीक सीखकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया है,राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन के तहत सारंगढ़ में आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन हुआ। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र रायपुर के संयुक्त प्रयास से 19 से 25 मार्च तक चले इस प्रशिक्षण में जिले के 50 किसानों, जिनमें महिला किसान भी शामिल थीं, ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीकों, शहद उत्पादन, रखरखाव और विपणन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि किस तरह कम लागत में इस व्यवसाय को शुरू कर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है,समापन कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे और जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडेय शामिल हुए। अतिथियों ने प्रतिभागी किसानों को प्रमाण पत्र और पपीते के पौधे वितरित कर उनके प्रयासों की सराहना की,कलेक्टर ने कहा कि सारंगढ़ जिले में सरसों की खेती अधिक होने के कारण मधुमक्खी पालन के लिए अनुकूल वातावरण है। इससे न केवल शहद उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि फसलों की पैदावार में भी सुधार होगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि संभव है,अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैकल्पिक आय के स्रोत उपलब्ध कराने में मददगार साबित हो रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं,यह पहल दिखाती है कि खेती के साथ नए प्रयोग ही किसानों की आय बढ़ाने का रास्ता हैं—अब मधुमक्खी पालन से बदलाव की नई उम्मीद जगी है।

