0- 10 से अधिक रिक्त पदों पर की जाएगी महिला परामर्श दाताओं की नियुक्ति
0-सुखी दाम्पत्य जीवन को बचाने महिला सदस्य करेंगे सकारात्मक पहल
रायपुर, 26 मार्च (आरएनएस)। आधुनिक समाज में तलाक के बढ़ते मामलों को देखते हुए रायपुर में कुटुम्ब न्यायालय की स्थापना की गई है, ताकि तलाक लेने वाले जोड़ों को उचित समझाइश देकर उनका घर टूटने से बचाया जा सके। इसके लिए प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय में परामर्श दाता नियुक्ति समिति का गठन करने का निर्णय लिया है।
छत्तीसगढ़ के रायपुर कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के द्वारा रायपुर में बढ़ते तलाक के मामले को देखते हुए अब उनके लिए सामाजिक पहल करने की कोशिश की है, जिसके तहत परामर्श नियुक्ति समिति का गठन किया जाएगा। इसके लिए कुल 10 पद रिक्त है, इसमें कुटुम्ब संबंधी विषयों में परामर्श के अनुभव रखने वालों को नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाएगी। कुटुम्ब न्यायालय द्वारा जारी विज्ञापन के अनुसार इसमें आहार्ता निम्रलिखित रखी गई है। जिसके अनुसार छत्तीसगढ़ कुटुम न्यायालय में नियुक्ति के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से सामाजिक विज्ञान तथा मनोविज्ञान विषय के साथ डिग्री प्राप्त करने वाले या सामाजिक कार्य बाल मनोविज्ञान या परिवार परामर्श में कम से कम दो वर्ष का अनुभव रखने वाले व्यक्ति को परामर्श दाता के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र होगा। शैक्षणिक अहार्ता एवं न्यूनतम अनुभव में उच्च न्यायालय के राज्य सरकार के अपवादित परिस्थितियों में छूट दी जा सकेगी, लेकिन परामर्श दाता की नियुक्ति तभी होगा, जब उसने 33 वर्ष की आयु प्राप्त कर ली हो और 60 वर्ष के कम की आयु का हो।
कुटुम्ब न्यायालय द्वारा जारी आदेशानुसार जो व्यक्ति न्यायाधीश रहा हो या कुटुम्ब संबंधी विषय पर परामर्श का संबंध रखता हो, अन्य बाते सामान्य होने पर नियुक्ति की मामले में प्राथमिकता दी जाएगी। ज्ञात रहे रायपुर शहर में आधुनिक समाज में इस समय तलाक के मामले बड़ी संख्या में बढ़ती जा रही है। इसके लिए कुटुम्ब न्यायालय की स्थापना की जा रही है। कुटुम न्यायालय में तलाक लेने के पति-पत्नी एडवोकेट को न्याय मित्र के रूप में रख सकते हैं। इसके अलावा प्रकरण के चलते समय परामर्श दाता नियुक्ति समिति के सदस्य आवश्यक समझाइश देते हैं, ताकि लोगों का घर बिखर न पाए। इसके लिए समझाईश दी जाती है। कुटुम्ब न्यायालय हरसंभव प्रयास करता है कि तलाक लेने वाले दंपत्ति को समझाइश देकर उनका घर टुटने से बचाया जा सके। हिन्दू समाज के शादी के लिए कई परंपराएं है, लेकिन आधुनिक समाज में अब बढ़ते आडम्बर में परिवार बिखर रहे हैं, जिससे दाम्पत्य जीवन बिखर जाता है।
आर. शर्मा
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