नई दिल्ली ,26 मार्च,। मिडिल ईस्ट में लगातार गहराते युद्ध और तनाव का सीधा असर अब भारतीय रसोई तक पहुंच गया है। इस बार महंगाई की मार सिर्फ पेट्रोल-डीजल या एलपीजी गैस तक सीमित नहीं है, बल्कि किचन की सबसे जरूरी चीज यानी खाने का तेल भी तेजी से महंगा होने लगा है। भारत में सुबह के नाश्ते में बनने वाले पराठे हों, बाजार के समोसे-जलेबी हों या फिर रोजमर्रा की सब्जियां, हर चीज में कुकिंग ऑयल का भरपूर इस्तेमाल होता है। ऐसे में खाने के तेल की कीमतों में आ रहा यह उछाला सीधे तौर पर आम आदमी की जेब ढीली कर रहा है और घर का बजट बिगाड़ रहा है।
महज एक महीने में बेतहाशा बढ़ गए कुकिंग ऑयल के दाम
बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक महीने के भीतर खाने के तेल की कीमतों में साफ और बड़ा उछाल देखने को मिला है। 24 फरवरी से 24 मार्च 2026 के बीच सूरजमुखी (सनफ्लावर) तेल की कीमत 175 रुपये से उछलकर 181 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं, पाम ऑयल 5 रुपये महंगा होकर 141 रुपये प्रति किलो के भाव पर आ गया है। इसके अलावा सोयाबीन तेल की कीमतों में भी 4 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि मूंगफली, वनस्पति और सरसों तेल के दाम करीब 3 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं।
लगातार बढ़ रही है खपत, आयात पर टिकी है भारत की निर्भरता
भारत में खाने के तेल का महत्व सिर्फ स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर को जरूरी फैट, ऊर्जा और पोषण देने का भी एक अहम स्रोत है। देश में कुकिंग ऑयल की मांग तो तेजी से बढ़ रही है, लेकिन घरेलू उत्पादन उस रफ्तार से नहीं बढ़ पा रहा है। साल 2022-23 के आंकड़ों के मुताबिक, शहरी भारत में एक व्यक्ति सालाना औसतन 12 किलो और ग्रामीण इलाकों में करीब 11 किलो तेल की खपत करता है। इस विशाल मांग को पूरा करने के लिए भारत को अपनी जरूरत का करीब 56 फीसदी तेल विदेशों से आयात करना पड़ता है, जबकि सिर्फ 44 फीसदी हिस्सा ही घरेलू उत्पादन से आता है।
आयात का बढ़ता बिल और पाम ऑयल का सबसे बड़ा हिस्सा
आयात के आंकड़े इस निर्भरता की पूरी कहानी खुद बयां करते हैं। साल 2017 में भारत ने 11.8 अरब डॉलर का खाने का तेल आयात किया था, जो 2022 में बढ़कर 21.1 अरब डॉलर के भारी-भरकम आंकड़े तक पहुंच गया। हालांकि, 2025 में यह आंकड़ा थोड़ा घटकर 18.6 अरब डॉलर रहा। भारत द्वारा मंगाए जाने वाले कुल तेल में सबसे बड़ी हिस्सेदारी पाम ऑयल की है जो 41 फीसदी है। इसके बाद 35 फीसदी के साथ सोयाबीन तेल और 18 फीसदी के साथ सूरजमुखी तेल का नंबर आता है।
सरकार का दावा- सप्लाई पर नहीं है कोई खतरा, मिशन आत्मनिर्भर भी शुरू
कीमतों में उछाल के बीच सरकार ने आम जनता को आश्वस्त किया है कि मौजूदा ईरान-इजरायल तनाव के बावजूद भारत में तेल की सप्लाई पर कोई बड़ा खतरा नहीं मंडरा रहा है। भारत केवल एक देश पर निर्भर नहीं है, बल्कि मलेशिया, इंडोनेशिया और अमेरिका जैसे कई देशों से तेल आयात करता है। ऐसे में किसी एक जगह से सप्लाई प्रभावित होने पर दूसरे विकल्प आसानी से मौजूद रहते हैं। इसके साथ ही, विदेशी निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सरकार ने ‘नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स-ऑयलसीड्सÓ की भी शुरुआत की है, जिसका मुख्य मकसद आने वाले वर्षों में देश के भीतर ही तिलहन और तेल का उत्पादन तेजी से बढ़ाना है।
00
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

