मनीला ,26 मार्च,। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया के कई देशों पर साफ दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में क्कद्धद्बद्यद्बश्चश्चद्बठ्ठद्गह्य ने ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते खतरे को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर आपातकाल घोषित कर दिया है। देश के राष्ट्रपति स्नद्गह्म्स्रद्बठ्ठड्डठ्ठस्र रूड्डह्म्ष्शह्य छ्वह्म्. ने आदेश जारी कर कहा कि मौजूदा हालात में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना और अर्थव्यवस्था को झटके से बचाना बेहद जरूरी हो गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर से बढ़ी चिंता
ढ्ढह्म्ड्डठ्ठ के साथ जारी तनाव, जिसमें ठ्ठद्बह्लद्गस्र स्ह्लड्डह्लद्गह्य और ढ्ढह्यह्म्ड्डद्गद्य भी शामिल हैं, के चलते स्ह्लह्म्ड्डद्बह्ल शद्घ ॥शह्म्द्वह्व5 पर आवाजाही प्रभावित हुई है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है। इसके बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है।
आयात पर निर्भरता बनी बड़ी चुनौती
क्कद्धद्बद्यद्बश्चश्चद्बठ्ठद्गह्य अपनी लगभग 98त्न तेल जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। ऐसे में संकट के बाद देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम लोगों की लागत और महंगाई दोनों बढ़ गई हैं।
सरकार ने उठाए आपात कदम
स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने एक विशेष निगरानी समिति गठित करने का फैसला किया है, जो ईंधन के साथ-साथ खाद्य पदार्थों और दवाइयों की आपूर्ति पर नजर रखेगी। साथ ही सरकार को सीधे तेल खरीदने के विशेष अधिकार भी दिए गए हैं, ताकि सप्लाई चेन बाधित न हो। यह आपातकाल फिलहाल एक वर्ष के लिए लागू किया गया है, जिसे जरूरत पडऩे पर बढ़ाया या समाप्त किया जा सकता है।
फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
सरकार के इस कदम पर देश में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां कुछ लोग इसे समय की जरूरत बता रहे हैं, वहीं मजदूर संगठनों ने इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि पहले हालात को सामान्य बताया गया और अब अचानक आपातकाल लागू कर दिया गया।
हड़ताल की तैयारी, राहत उपाय भी जारी
बढ़ती ईंधन कीमतों से नाराज ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लोग हड़ताल की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि महंगे ईंधन से उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है। सरकार ने कुछ राहत उपाय भी शुरू किए हैं, जैसे ड्राइवरों को सब्सिडी देना और ईंधन की खपत कम करने के लिए कार्यदिवस घटाने जैसे कदम।
फिलहाल देश के पास सीमित अवधि का ईंधन भंडार बचा है। ऐसे में यह संकट न केवल क्कद्धद्बद्यद्बश्चश्चद्बठ्ठद्गह्य बल्कि दुनिया के अन्य तेल-आयातक देशों के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
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