0 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा
0 दिन में बिजली उपयोग पर 20 प्रतिशत छूट, पीक आवर में देना होगा अतिरिक्त चार्ज
रायपुर, 28 मार्च (आरएनएस) । अब बिजली का बिल आपके उपयोग के समय पर निर्भर करेगा। व्यवस्था के तहत दिन के अलग-अलग समय पर बिजली दरें अलग होंगी। राज्य बिजली कंपनी के इस कदम के बाद छत्तीसगढ़ में भी इस प्रणाली को लागू करने के संकेत मिले हैं, जिससे उपभोक्ताओं को अपनी खपत बेहतर तरीके से प्रबंधित करने का मौका मिलेगा। ऊर्जा सचिव डा. रोहित यादव ने बताया कि पीक आवर्स के दौरान लोड कम करने के लिए उपभोक्ताओं को रियायत और जागरूकता संदेश भेजने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
पड़ोसी राज्य बिहार में 1 अप्रैल 2026 से स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए टाइम ऑफ डे (टीओडी) टैरिफ लागू किया जा रहा है। इस टाइम ऑफ डे (टीओडी) टैरिफ का मतलब है कि बिजली की कीमतें समय के अनुसार तय की जाएंगी। जब बिजली की मांग अधिक होती है, तब दरें बढ़ेंगी और कम मांग के समय दरें घटेंगी। नई व्यवस्था के तहत दिन को तीन अलग-अलग समय स्लॉट में बांटा गया है। इससे करीब 87 लाख स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को अपनी खपत को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली का उपयोग करने पर उपभोक्ताओं को सामान्य दर से 20 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। वहीं, शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक बिजली का उपयोग करने पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत चार्ज देना पड़ सकता है।
ऐसे करें बिजली बिल में बचत
विशेषज्ञों के अनुसार, उपभोक्ता यदि वाशिंग मशीन, गीजर, पानी की मोटर या प्रेस जैसे भारी उपकरणों का उपयोग दिन के समय करें, तो वे आसानी से बिजली बिल में बचत कर सकते हैं। स्मार्ट मीटर और डिजिटल ऐप्स के जरिए उपभोक्ता अपनी खपत पर नजर रख सकेंगे और सही समय पर उपयोग करके खर्च कम कर पाएंगे।
स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य
यह नियम फिलहाल केवल उन्हीं उपभोक्ताओं पर लागू होगा, जिनके यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से बिजली ग्रिड पर दबाव कम होगा और कटौती की समस्या में भी राहत मिलेगी। यह उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिल कम करने का एक बेहतर अवसर साबित हो सकता है।
सहदेव ठाकुर, कार्यपालक निदेशक, राजस्व, सीएसपीडीसीएल ने बताया कि पिछले टैरिफ में ही 10 किलो वॉट से अधिक खपत वाले उपभोक्ताओं पर टाइम ऑफ डे सिस्टम का प्रविधान किया जा चुका है, लेकिन स्मार्ट मीटर लगाने का काम पूरा नहीं होने के कारण फिलहाल यह लागू नहीं हो पाया है। सितंबर महीने तक चरणबद्ध तरीके से इस सिस्टम को लागू करने की पूरी तैयारी है।
एसएस
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