मॉस्को ,28 मार्च,। वैश्विक तेल बाजार में जारी उथल-पुथल के बीच रूस ने बड़ा कदम उठाते हुए 1 अप्रैल से पेट्रोल (गैसोलीन) के निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले की आधिकारिक पुष्टि रूसी सरकार ने कर दी है।
रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने शुक्रवार को ऊर्जा मंत्रालय को निर्देश जारी करते हुए 1 अप्रैल से पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। रूसी समाचार एजेंसी ञ्ज्रस्स् के मुताबिक, यह प्रतिबंध चार महीने यानी 31 जुलाई तक लागू रह सकता है।
सरकार के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल और पेट्रोलियम बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है। इससे कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि, रूस ने यह भी कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी ऊर्जा संसाधनों की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में कच्चे तेल का रिफाइनिंग स्तर पिछले वर्ष जैसा ही बना हुआ है, जिससे घरेलू स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति स्थिर रहेगी।
इस फैसले के पीछे घरेलू कारण भी अहम हैं। पिछले साल रूस और उसके नियंत्रण वाले यूक्रेन के कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल की कमी देखने को मिली थी। उस दौरान यूक्रेन की ओर से रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले तेज कर दिए गए थे, जिससे आपूर्ति प्रभावित हुई थी।
इसके साथ ही, एक अवधि में घरेलू ईंधन मांग चरम पर पहुंच गई थी। इन परिस्थितियों ने सरकार को सतर्क कर दिया, और अब वह किसी भी संभावित कमी से बचने के लिए निर्यात पर रोक लगा रही है।
यह पहली बार नहीं है जब रूस ने ईंधन निर्यात पर सख्ती दिखाई है। घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखने और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार पहले भी पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा चुकी है।
उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, रूस ने पिछले वर्ष करीब 50 लाख मीट्रिक टन पेट्रोल का निर्यात किया था, जो औसतन लगभग 1,17,000 बैरल प्रतिदिन के बराबर है। इस बड़े हिस्से को अंतरराष्ट्रीय बाजार से हटाकर घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित रखना ही इस फैसले का मुख्य उद्देश्य है।
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