भानुप्रतापपुर, 28 मार्च (आरएनएस)। आरीडोंगरी स्थित सीएमडीसी माइंस को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भाईसाकंहार के सरपंच रमल कोर्राम ने प्रेस वार्ता कर आदिवासी किसान विकास समिति के कुछ पदाधिकारियों एवं खनन ठेकेदारों पर तीखे और गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मिलिभगत से माइंस को निजी कमाई का जरिया बना दिया गया है, जिससे क्षेत्र और शासन दोनों को नुकसान हो रहा है।
सरपंच रमल कोर्राम ने स्पष्ट किया कि वे माइंस या शासन-प्रशासन के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि माइंस में हो रही कथित अनियमितताओं और भ्रष्ट कार्यप्रणाली का विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि माइंस में वर्करों की भर्ती बिना ग्राम पंचायतों और समिति के सभी सदस्यों की सहमति के की गई है। प्रभावित गांवों के स्थानीय लोगों को नजरअंदाज कर बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी गई, जिससे स्थानीय युवाओं के साथ अन्याय हुआ है।
मजदूरी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। उन्होंने कहा कि मजदूरों से प्रशिक्षण के नाम पर काम लेकर मात्र 180 रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जा रहा है, जो निर्धारित मानकों से काफी कम है। इसे उन्होंने श्रमिकों का शोषण बताया।
इसके अलावा सरपंच ने आरोप लगाया कि समिति के कुछ पदाधिकारी खनन ठेकेदारों के साथ सांठगांठ कर अपनी निजी गाडिय़ां और मशीनें माइंस में लगाकर कमीशन ले रहे हैं। माइंस से मिलने वाली 2 प्रतिशत लाभांश राशि के उपयोग में भी पारदर्शिता नहीं है और इसका कोई हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया है।
लौह अयस्क परिवहन में भी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों और मजदूरों से अलग-अलग मदों में राशि वसूली जा रही है, लेकिन उसका कोई लेखा-जोखा नहीं दिया जा रहा। समिति के नाम का उपयोग कर कुछ लोग परिवहन ठेकेदारी में भी एकाधिकार स्थापित कर रहे हैं।
सरपंच रमल कोर्राम ने यह भी आरोप लगाया कि खनिज नीलामी में दर कम होने से शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है, जिससे क्षेत्रीय विकास प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो क्षेत्र के लोग धरना-प्रदर्शन और अनशन के लिए बाध्य होंगे। साथ ही उन्होंने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और मीडिया से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है।
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