बीजापुर, 28 मार्च (आरएनएस)। कृषि विज्ञान केंद्र, बीजापुर में मशरूम उत्पादन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह-आदान वितरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. हरविंदर कुमार सिंह (वैज्ञानिक, मशरूम उत्पादन) इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर से उपस्थित रहे। प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. शमशेर आलम ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए बीजापुर क्षेत्र के लिए उपयुक्त मशरूम प्रजातियों एवं उत्पादन लागत की विस्तृत जानकारी दी।
मुख्य अतिथि डॉ. सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि धान का पुआल, गेहूं का भूसा जैसे कृषि अवशेषों का उपयोग कर आसानी से मशरूम उत्पादन किया जा सकता है। उन्होंने इसे उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का स्रोत बताते हुए कुपोषण दूर करने और किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मशरूम उत्पादन के बाद बचा हुआ अवशेष उच्च गुणवत्ता की केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) बनाने में उपयोगी होता है, जिससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है।
कार्यक्रम में केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. राजकमल पटेल ने मशरूम उत्पादन से प्राप्त खाद के प्राकृतिक एवं जैविक खेती में महत्व पर प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण में विभिन्न ग्रामों से आए 50 से अधिक किसानों, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं एवं प्रगतिशील किसान बंधुओं ने भाग लिया। इस दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की प्रायोगिक जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को मशरूम स्पॉन एवं प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में डॉ. मिथिलेश कुमार, डॉ. भूपेंद्र, डॉ. सुनीता पटेल, अरविंद आयाम, डॉ. दिनेश कुमार मारापी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए आय के नए स्रोत खोलने और क्षेत्र में पोषण एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
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