मेरठ, 28 मार्च (आरएनएस)। दूध विक्रेताओं को भी अब लाइसेंस लेना होगा। तभी वह अपना कारोबार कर सकते हैं। हालांकि मेरठ में लगभग 21 हजार दूध विक्रेताओं के पास लाइसेंस पहले से है। डोर-टू-डोर दूध बेचने वाले दूधियों के लिए भी अब लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है।
जिनके पास लाइसेंस है, वह अधिकतर वह दूध विक्रेता है, जो कापरेटिव सोसायटी में दूध बेचते हैं। मेरठ जनपद में लगभग 15 हजार ऐसे दूधिया है, जिनके पास लाइसेंस नहीं है और उन्हें अब लाइसेंस लेना जरूरी है। शासन ने लाइसेंस प्रक्रिया को इसलिए आसान बनाया है। आनलाइन आवेदन करना होगा और ई-मेल पर लाइसेंस उपलब्ध हो जाएगा।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी रवि शर्मा ने बताया कि लाइसेंस प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपभोक्ताओं को इसका फायदा मिलेगा। कई बार होता है कि दूधिया एडवांस में पैसा ले लेते हैं और समय पर दूध नहीं देते हैं, ऐसे में दूधिया के खिलाफ कानूनी रूप से शिकायत की जा सकती है। वहीं, दूध में मिलावट की भी शिकायत कर सकते हैं। ताकि विभागीय कार्रवाई हो सके। शिकायत पर लाइसेंस कैंसिल तक हो सकता है।
रवि शर्मा के अनुसार, दूधिया फोस्कोस डॉट एफएसएसएआई डॉट कॉमगोव डॉट इन पर अपना आवेदन कर सकते हैं। यहां पर दूधिया का नाम और पता मांगा जाएगा। आधार कार्ड नंबर भरना होगा। फीस के लिए आप्शन आएगा तो उसे आनलाइन जमा करना होगा। एक साल की फीस 100 रुपये और पांच साल की 500 रुपये जमा करनी होगी।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. पवित्र सिंह ने बताया कि जनपद मेरठ के दूध उत्पादन की 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार, 1054 हजार मिट्रिक टन दूध का रोजाना उत्पादन होता है। वर्तमान में लगभग 1114 हजार मिट्रिन टन दूध का उत्पादन होता है। हालांकि 2024-25 की रिपोर्ट अभी वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुई है।
डोर-टू-डोर दूध बेचने वाले दूधियाओं के लिए शासन ने अब लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है। इसलिए हर किसी को लाइसेंस लेना होगा, जो नहीं लेगा उसे गैर कानूनी माना जाएगा। हमारे यहां 21 हजार दूधिया ने लाइसेंस लिया हुआ है। अभी लगभग 15 हजार को और लेना होगा।
-रवि शर्मा, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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