चमोली,29 मार्च (आरएनएस)। आपदा प्रभावित धुर्मा और सेरा गांव में अभी तक सुरक्षात्मक कार्य आरंभ नहीं हो पाए हैं। घरों के सामने आज भी मलबे के ढेर लगे हुए हैं। ऐसे में आपदा प्रभावित फिर से भय के साए में हैं। पिछले साल 17 सितंबर की रात को बादल फटने से मोक्ष नदी और शांरा पाखा नदी उफान पर आ गई थी। इसने धुर्मा व सेरा गांव के करीब 60 परिवार प्रभावित हुए थे। आपदा प्रभावितों का कहना है कि अभी तक नदी किनारे सुरक्षा दीवार के कार्य आरंभ नहीं हुए हैं। आवाजाही के लिए सुरक्षित पुल भी नहीं हैं। बादल फटने से आए मलबे ने नदी का स्तर काफी ऊंचा हो रखा है। घरों के सामने नदी के कटाव से स्थिति काफी खराब हो रखी है। बरसात में यदि नदी का जलस्तर बढ़ता है तो पानी सीधे घरों में घुस जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि मार्च माह खत्म होने वाला है, जून के बाद कभी भी बरसात शुरू हो जाएगी। इसको लेकर लोगों में भय की स्थिति बनी हुई है। हालात बिगडऩे कभी भी विगड़ सकते हैं।धुर्मा गांव के ग्राम प्रधान पुष्पेंद्र ने बताया कि क्षेत्र में सुरक्षात्मक कार्य कराने को लेकर शासन स्तर पर कई बार मांग की गई। लेकिन अभी तक आपदा प्रभावितों की नहीं सुनी जा रही है। क्षेत्र में नदी पार करने के लिए जो भी पैदल पुल थे वे ध्वस्त हो चुके हैं, ऐसे में बरसात में नदी पार करना ही लोगों के लिए चुनौती बन जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के कार्य आरंभ किए जाएं, ताकि बरसात में किसी भी तरह के नुकसान को रोका जा सके।
जल्द समाधान न होने पर दी आंदोलन की चेतावनी
– आपदा प्रभावितों का सब्र अब जवाब देने लगा है। स्थानीय आपदा पीडि़त मंगल सिंह का कहना है कि आपदा को सात माह बीत चुके हैं। क्षेत्र प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षात्मक कार्यों के लिए कोई योजना तैयार नहीं हुई है। बार-बार सरकार से मांग की जा रही है, यदि सरकार ने जल्द सुरक्षात्मक कार्य आरंभ नहीं किए तो आपदा प्रभावितों को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
आपदा में तबाह हुई कृषि भूमि
– आपदा से सेरा में लोगों की कृषि भूमि पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। नदी का स्तर इतना उठ चुका है कि खेत और नदी एक लेवल पर आ रखे हैं। खेतों में मलबे के ढेर लगे हुए हैं। ऐसे में लोगों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा होने वाला है।
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