०आत्मनिर्भरता, रोजगार और सम्मान की नई कहानी लिखेंगी ग्रामीण महिलाएं
सुरेश मिनोचा
एमसीबी ,01 अप्रैल (आरएनएस)। विकासखंड मनेंद्रगढ़ के ग्राम लोहारी में शुरू हुआ आजीविका सेवा केंद्र अब सिर्फ एक सुविधा केंद्र नहीं, बल्कि महिलाओं के सपनों, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का नया आधार बनकर उभर रहा है। एकीकृत कृषि क्लस्टर परियोजना के तहत स्थापित यह केंद्र ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और कौशल आधारित सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत पहचान देगा।कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजेश साहू की उपस्थिति में हुआ, जहां जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और विभिन्न आजीविका से जुड़े कार्यकर्ताओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। पूरे आयोजन में महिलाओं की सक्रिय उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब गांव की महिलाएं केवल सहभागिता नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ रही हैं।महिलाओं के लिए ‘वन-स्टॉप समाधानÓ बनेगा केंद्रउज्जवल बिहान महिला आजीविका संकुल संगठन, घुटरा द्वारा संचालित यह केंद्र महिलाओं के लिए एक वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा। यहां उन्हें कृषि आधारित गतिविधियों, स्वरोजगार, प्रशिक्षण, कनीकी मार्गदर्शन और विपणन से जुड़ी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी। इससे महिलाओं को अपने व्यवसाय को बढ़ाने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिलेगा।आर्थिक आज़ादी से बढ़ेगा आत्मविश्वासविशेषज्ञों का मानना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। यह केंद्र महिलाओं को न केवल आय का साधन देगा, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की क्षमता, आत्मसम्मान और सामाजिक पहचान भी प्रदान करेगा।गांव की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तारयह पहल केवल महिलाओं तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण क्षेत्र के विकास से जुड़ी है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढऩे से पलायन रुकेगा और गांव की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।बदलाव की शुरुआतÓ-अतिथियों ने बताया ऐतिहासिक कदमकार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने इसे महिलाओं के शक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि ऐसे केंद्र ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने महिलाओं को आगे बढऩे, नए अवसरों का लाभ लेने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम के अंत में नवा बिहान महिला आजीविका संकुल संगठन के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया। लोहारी का यह केंद्र अब केवल एक शुरुआत नहीं, बल्कि उस बदलाव की नींव है, जहां महिलाएं ‘सहयोगीÓ नहीं, बल्कि ‘नेतृत्वकर्ताÓ बनकर उभरेंगी।
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