० सभी फोर्स के समन्वित प्रयासों ने असंभव को संभव कर दिखाया है।
० नक्सल मुक्त बस्तर का लक्ष्य अब औपचारिक।
केशव सल्होत्रा
जगदलपुर, 01 अप्रैल (आरएनएस)। बस्तर संभाग में पिछले 31 दिनों की उपलब्धियों ने स्पष्ट कर दिया है कि मिशन 2026 अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुका है। एक महीने में 170 माओवादी कैडरों की मुख्यधारा में वापसी — विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज के साथ जुडऩे का निर्णय लिया। रेंज के शेष बचे वरिष्ठ माओवादी कैडर डीकेएसजेडसीएम पापाराव सहित कई डीव्हीसीएम स्तर के कैडरों के आत्मसमर्पण से संगठन की नेतृत्व संरचना पूर्ण रूप से निष्क्रिय हो चुकी है।
343 से अधिक घातक हथियार बरामद —एके-47, आईएनएसएएस, एसएलआर, बीजीएल लांचर और एलएमजी जैसे हथियारों की बड़ी बरामदगी ने माओवादी सैन्य क्षमता को लगभग समाप्त कर दिया है।
डंप से भारी आर्थिक संसाधन बरामद — पिछले 31 दिनों में ?6.75 करोड़ नकद तथा 8 किलोग्राम सोना (?12 करोड़ से अधिक मूल्य) की बरामदगी माओवादी तंत्र के आर्थिक आधार के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत है। नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में एक ही महीने की अवधि में इतनी बड़ी नकदी और सोने की बरामदगी एक महत्वपूर्ण कीर्तिमान है।
27 महीनों में 2700 से अधिक माओवादी पुनर्वासित। यह आँकड़ा बस्तर में स्थायी शांति और विश्वास के वातावरण को दर्शाता है।
स्थायी शांति एवं विकास की ओर बढ़ता बस्तर — शासन की मंशानुरूप सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन, स्थानीय जनता और सभी संबंधित हितधारकों के संयुक्त प्रयासों से नक्सल-मुक्त बस्तर का लक्ष्य अब केवल औपचारिक पूर्णता की ओर अग्रसर है
आईजी सुन्दरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि मिशन 2026 के तहत बस्तर आज एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। लंबे समय तक हिंसा और भय के साये में रहा यह क्षेत्र अब शांति, विश्वास और विकास की नई दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन और बस्तर की जनता के संयुक्त संकल्प ने नक्सल-मुक्त बस्तर के लक्ष्य को लगभग साकार कर दिया है। अब बस्तर स्थायी शांति, प्रगति और जनविश्वास के एक नए अध्याय की ओर आत्मविश्वास के साथ अग्रसर है।
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