नई दिल्ली,03 अपै्रल (आरएनएस)। महिला आरक्षण संशोधन को लेकर 16 अप्रैल को विशेष संसदीय सत्र बुलाया गया है लेकिन, कांग्रेस चुनावी मौसम में समर्थन देने को तैयार नहीं नजर आ रही. सूत्रों के मुताबिक सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक में प्रस्तावित संशोधनों पर सर्वसम्मति बनाने के लिए विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं से गहन संपर्क की शुरुआत भी कर दी है. सरकार इस मुद्दे पर एकमत बनाने के लिए विशेष संसदीय सत्र 16 अप्रैल को बुलाने का फैसला कर चुकी है. हालांकि, लोकसभा चुनाव से पहले कई राज्यों में विधानसभा चुनावों के बीच कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस संशोधन का समर्थन करने के लिए तैयार नहीं है.
महिला आरक्षण संशोधन को लेकर राजनीतिक पार्टियों के बीच खूब सियासत गर्म है हालांकि सूत्रों की माने तो सरकार के दो वरिष्ठ नेता, पिछले दो दिनों से विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं से फोन पर और अनौपचारिक बैठकें कर रहे हैं. सूत्र बताते हैं कि इन संपर्कों का मुख्य उद्देश्य 2023 में पारित महिला आरक्षण अधिनियम (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) में कुछ तकनीकी और क्रियान्वयन संबंधी संशोधन कराने के लिए विपक्ष का समर्थन हासिल करना है. इन संशोधनों में आरक्षण की समय-सीमा, परिसीमन प्रक्रिया में तेजी और कुछ राज्यों में विशेष प्रावधान शामिल हैं. सरकार का तर्क है कि महिला आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करने के लिए संशोधन जरूरी है ताकि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके.
हालांकि एक वरिष्ठ विपक्षी पार्टी के नेता ने बताया, हम चाहते हैं कि यह मुद्दा राजनीतिक द्वंद से ऊपर उठे. महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सभी दलों को एक साथ आना चाहिए.
विपक्षी दलों में सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ने अभी तक सकारात्मक रुख नहीं अपनाया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने करीबी नेताओं के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है कि चुनावी मौसम में इस तरह के संशोधन पर चर्चा करना राजनीतिक चाल है. कांग्रेस का कहना है कि सरकार पहले से ही कई राज्यों में चुनावी प्रक्रिया चला रही है और ऐसे में अचानक विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष को दबाव में डालने की कोशिश की जा रही है.
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, हम महिला आरक्षण के सिद्धांत का पूरी तरह समर्थन करते हैं, लेकिन सरकार की मंशा संदिग्ध है. जब देश चुनावी मोड में है, तब अचानक संशोधन लाकर सरकार अपना एजेंडा थोपना चाहती है. हम इस पर गंभीरता से विचार करेंगे, लेकिन फिलहाल समर्थन नहीं कर सकते.
सूत्रों की माने तो सरकार का विपक्ष के अन्य दलों जैसे तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के नेताओं से भी संपर्क हुआ है. कुछ छोटे दलों ने सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन कांग्रेस के रुख के कारण पूर्ण सर्वसम्मति अभी दूर नजर आ रही है.
संसदीय सूत्रों के मुताबिक, 16 अप्रैल को बुलाए जाने वाले विशेष सत्र में लोकसभा और राज्यसभा दोनों में चर्चा होगी. यदि सर्वसम्मति नहीं बनी तो सरकार संभवत: बहुमत के आधार पर विधेयक पारित करने का रास्ता अपनाएगी, लेकिन इससे राजनीतिक विवाद बढ़ भी सकता है. हालांकि विपक्ष का आरोप है कि इस मुद्दे पर सरकार की सक्रियता चुनावी लाभ के लिए भी है.
महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए भाजपा इस संशोधन को अपना एजेंडा बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे चुनावी स्टंट करार दे रही है. विपक्षी एकता और सरकार की रणनीति के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीति का केंद्र बिंदु बनता जा रहा है.
००
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

