ऋषिकेश,04 अपै्रल (आरएनएस)। परमार्थ निकेतन में तीन दिवसीय नानी बाई का मायरा की कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के माध्यम से भक्ति, त्याग, प्रेम और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का संदेश दिया जा रहा है। शनिवार को परमार्थ निकेतन में आयोजित कथा का के पहले दिन कथावाचक संत अमृतराम महाराज ने कहा कि यह कथा भगवान श्रीकृष्ण के प्रति निस्वार्थ प्रेम और पूर्ण समर्पण का जीवंत उदाहरण है। यह कथा हमें संदेश देती है कि जब जीवन में कठिनाइयां आती हैं, तब ईश्वर स्वयं अपने भक्तों की रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। यह कथा विश्वास दिलाती है कि सच्ची भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती और भगवान अपने भक्तों के मान-सम्मान की रक्षा अवश्य करते हैं। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि “नानी बाई का मायरा” की कथा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जिसमें श्रद्धा, सेवा, करुणा और विश्वास के मूल्यों का समावेश है। जीवन की हर परिस्थिति एक संदेश, एक सीख और एक अवसर बन जाती है। जब हम शिकायत छोड़कर कृतज्ञता को अपनाते हैं, तब दिशा भी बदलती है और दशा भी। यही भाव हमें भीतर से प्रकाशित कर, जीवन को शांति, प्रेम और आनंद से भर देता है। मौके पर गीता देवी, कन्हैया लाल चांडक, संजय चांडक, संदीप चांडक, संपूर्ण चांडक आदि उपस्थित रहे।
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