-बागवानों ने की नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग
उत्तरकाशी,04 अपै्रल (आरएनएस)। क्षेत्र में शनिवार दोपहर बाद हुई भारी ओलावृष्टि से सेब बागानों को नुकसान पहुंचा है। बगीचों में सेब की फ्लावरिंग ओलावृष्टि से नष्ट हो गई है। इससे किसान चिंतित नजर आने लगे हैं। बागवानों ने नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग की है। शनिवार को क्षेत्र के करड़ा, सल्ला और धड़ौली में दोपहर बाद जमकर ओलावृष्टि हुई। बागवानों का कहना है कि इस समय बागानों में सेब की फ्लावरिंग चल रही है, ऐसे में ओलों की मार से भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय बागवान कपिल रतूड़ी, रामप्रसाद, विनोद रतूड़ी, जशवीर, श्याम लाल, जगदीश रतूड़ी, विजेंद्र रावत, अमीन सिंह और गोपाल भंडारी ने बताया कि अचानक हुई ओलावृष्टि से पेड़ों पर आए नाजुक फूल झड़ गए हैं। सेब की फ्लावरिंग प्रभावित होने से इस सीजन की पैदावार कम होनी तय है। बागवानों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह बना रहा तो नुकसान और बढ़ सकता है। उनका कहना है कि सेब की खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और इस तरह की प्राकृतिक आपदा से उन्हें भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने कृषि एवं उद्यान विभाग से भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करने और बागवानों को राहत प्रदान करने की मांग की है।
सेब आडू, पुलम खुमानी की फसल को हुआ भारी नुकसान: पहले सूखे से और अब ओलावृष्टि ने काश्तकारों की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार को हुई ओलावृष्टि और तेज आंधी से पल्ली मुंगरसन्ति के धारी कफनौल क्षेत्र में सेब आड़ू, पुलम खुमानी की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। तेज बारिश और ओलों की मार से गेहूं, टमाटर, मटर, फ्रेंचबीन, प्याज, लहसुन की फसल भी खराब हो गई है। धारी कफनौल क्षेत्र में जमकर हुई ओला वृष्टि से सेब की फसल को बचाने के लिए लगाई गई जालियां फट गई। तेज आंधी से सेब की पौधों की टहनियां तक टूट गई और फूल झड़ गए। किसान भूषण से सम्मानित हिमरौल गांव के काश्तकार जगमोहन राणा और रमेश इंदवाण ने बताया कि काश्तकारों की आजीविका नगदी फसलों पर निर्भर है। ओलावृष्टि और आंधी से नगदी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। आज कल सेब की पौधों पर फ्लावरिंग हो रही है, तेज आंधी से फूल झड़ गए हैं। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से क्षेत्र का मुआयना करने की मांग की है। संवाद
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