-वरिष्ठ प्रोफेसरों को नजरअंदाज कर जूनियर को बनाया कुलपति
-वरिष्टतम प्रोफेसरों में क्षोभ एवं असंतोष
अयोध्या 5 अप्रैल (आरएनएस)। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज में जहां एक ओर कार्यवाहक कुलसचिव डॉ पी एस प्रमाणिक को विश्वविद्यालय का कार्यवाहक कुलपति गया बना दिया गया है। वहीं दूसरी ओर उच्च शिक्षा के इतिहास में दुलर्भ करनामे देखने को मिल रहे हैं। विश्वविद्यालय के निवर्तमान कुलपति डॉ बिजेन्द्र सिंह ने अवध विश्वविद्यालय की व्यस्तता को लेकर राजभवन से जताई थी। विश्वविद्यालय में कार्यरत आधा दर्जन वरिष्ठतम प्रोफेसरों को छोड़ कर कुलपति डॉ बिजेन्द्र सिंह ने विश्वविद्यालय के एक्टिंग कुल सचिव को कुलपति बनाए जाने की सिफारिश की थी जबकि डॉ पी एस प्रमाणिक वरिष्ठता सूची में है 6 वें नंबर पर हैं।
अब विश्वविद्यालय के एक्टिंग रजिस्ट्रार को कुलपति का कार्यवाहक प्रभार सौंप दिए जाने के बाद विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसरों में गहरा असंतोष व्याप्त हो गया है। बताते चलें कि कृषि विश्वविद्यालय के कुल सचिव पद प्रशासन की ओर से किसी प्रशासनिक अधिकारी की तैनाती न किए जाने के बाद से विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक को ही कुल सचिव का प्रभार विगत कई वर्षों से दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय की कुलपति रहे डॉ बिजेंद्र सिंह ने बरिष्टतम सूची को दरकिनार कर डॉ पी एस प्रमाणिक को अपना एस मैन मानते हुए विश्वविद्यालय के कुल सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया था। उनकी तैनाती किए जाने के बाद भी तत्कालीन वरिष्ठ शिक्षकों ने गहरा विरोध और असंतोष जताया था लेकिन कुलाधिपति एवं कुलपति की मनमानी के आगे किसी की एक न चली थी। वर्तमान समय में कृषि विश्वविद्यालय में तैनात प्रोफेसरों की वरिष्ठता सूची में सबसे नंबर एक पर डॉ प्रतिभा सिंह, दूसरे पर डॉ आर के दोहरे, तीसरे पर डॉ भगवान दीन, चौथे पर डॉ आर के जोशी, पांच वें पर डॉ नमिता जोशी तथा छठवें नंबर पर डॉ पी एस प्रामाणिक और सातवें नंबर पर डॉ सुशांत श्रीवास्तव का नाम दर्ज है। इस प्रकार से विश्वविद्यालय के पांच वरिष्ठ प्रोफेसरों को नजरअंदाज कर कुलपति का दायित्व कुलाधिपति की ओर से सौंप दिया गया है। विश्वविद्यालय कर्मियों ने दबी जुबान से बताया कि यह सब कारनामा विश्वविद्यालय के कुलपति रहे डॉ विजेंद्र सिंह का है, जिन्होंने अपने कार्यकाल में किए गए भ्रष्टाचार को छिपाने और उसे दबाने के लिए अपने करीबी एवं नियम विरुद्ध कुल सचिव का प्रभाव संभाल रहे डॉ पी एस प्रमाणिक को कुलपति का अतिरिक्त दायित्व दिलाया है। क्योंकि इनके कुलपति बने रहते डॉ विजेंद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर प्रचलित तमाम जांच दबी रह जाएगी और उनके बाल बांका नहीं हो सकेगा।
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

