0 सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद यूपीएससी ने छत्तीसगढ़ सरकार को पूछा कि अब तक पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति क्यों नहीं?
रायपुर, 06 अप्रैल (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक के लिए आईपीएस अरुण देव के नाम पर मुहर लगाने का फैसला कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट की यूपीएससी को नोटिस के बाद सरकार ने यह निर्णय किया है। चूंकि शीर्ष अदालत की नोटिस का टाइम निकल गया है, लिहाजा सोमवार को कोर्ट खुलने के पहले सरकार आदेश जारी कर सकती है। हालांकि डीजीपी की दौड़ में आईपीएस हिमांशु गुप्ता का नाम भी प्रमुख है। मगर नक्सल मुद्दे पर बड़ी कामयाबी को देखकर प्रभाारी डीजीपी अरुण देव की जगह पर अगर हिमांशु गुप्ता को डीजीपी बनाया जाए, इसको लेकर सरकार खुद उलझन मेंं है।
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद संघ लोक सेवा आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र भेजकर पूछा था कि अब तक राज्य में पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। आयोग ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए जवाब तलब किया था। छत्तीसगढ़ सरकार ने अब तक पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना की कापी आयोग को नहीं भेजी है।
बता दें, यूपीएससी ने 13 मई 2025 को ही डीजीपी के लिए दो आईपीएस अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेज दिया था। नियमानुसार, सरकार को इस पैनल में से किसी एक अधिकारी को पूर्णकालिक डीजीपी के पद पर नियुक्त करना था। आयोग ने पूछा है कि 3 जुलाई 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन अब तक क्यों नहीं हुआ? यदि विलंब हुआ है, तो उसका ठोस कारण बताया जाए।
छत्तीसगढ़ सरकार ने यूपीएससी के पैनल के आधार पर अरुण देव गौतम को डीजीपी तो नियुक्त किया, लेकिन उन्हें ‘पूर्णकालिकÓ प्रभार देने के बजाय ‘प्रभारीÓ डीजीपी बना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ‘प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकारÓ मामले में स्पष्ट कहा था कि किसी भी राज्य में प्रभारी डीजीपी की परंपरा नहीं चलेगी।
एसएस
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

