बिलासपुर, 6 अप्रैल 2026 (आरएनएस) — एक ऐसा मंच जहां पुलिस, समाज, न्यायपालिका, शिक्षा जगत और स्वयंसेवी संगठन एक साथ खड़े दिखे, एक ऐसा आयोजन जिसने सिर्फ तालियां नहीं बल्कि सोच बदलने का संदेश दिया, अंतर्राष्ट्रीय चेतना दिवस के मौके पर पुलिस लाइन स्थित चेतना भवन में आयोजित “अंतर्राष्ट्रीय चेतना दिवस संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह–2026” ने बिलासपुर में सामाजिक जागरूकता की नई लहर पैदा कर दी, इस भव्य कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह (IPS) की मौजूदगी ने इसे और खास बना दिया जहां 20 से ज्यादा सामाजिक, साहित्यिक और पत्रकार संगठनों ने एक सुर में पुलिस द्वारा चलाए जा रहे चेतना अभियान की खुलकर सराहना की और SSP रजनेश सिंह को इस जनआंदोलन का जनक बताते हुए सम्मानित किया, कार्यक्रम में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति चंद्रभूषण बाजपेयी, बिहार के थावे विद्यापीठ के कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक, CMD कॉलेज के चेयरमैन पं. संजय दुबे, बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अजीत मिश्रा सहित कई दिग्गज मौजूद रहे जिन्होंने साफ कहा कि आज समाज को सबसे ज्यादा जरूरत चेतना की है और बिलासपुर पुलिस इस दिशा में एक मॉडल बनकर उभरी है, SSP रजनेश सिंह ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस अकेले बदलाव नहीं ला सकती, जनता की भागीदारी ही असली ताकत है और ‘चेतना’ इसी साझेदारी का मजबूत पुल है जो समाज और पुलिस के बीच विश्वास को नई ऊंचाई देता है, कार्यक्रम के दौरान चेतना अभियान के आठों आयामों पर विस्तार से चर्चा हुई और बताया गया कि कैसे यह पहल सामाजिक बुराइयों पर सीधा प्रहार कर रही है और अपराध नियंत्रण में अहम भूमिका निभा रही है, मंच पर NHICF और विभिन्न NGOs ने पुलिस अधिकारियों, समाजसेवियों और विशेषज्ञों को सम्मानित किया जिसमें सहायक उपनिरीक्षक प्रदीप यादव, सुश्री उमा ध्रुव, सेवानिवृत्त ASI राम प्रसाद सिंह यादव, सकरी TI विजय चौधरी, उप निरीक्षक जे.पी. निषाद, समाजसेवी सिमरन तिलरेजा, साइबर एक्सपर्ट प्रभाकर तिवारी सहित कई नाम शामिल रहे, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी माहौल को भावनात्मक बना दिया जहां मास्टर तनिष्क के गीतों और 8 वर्षीय मयंशी खंडेलवाल की प्रस्तुति “जिंदगी प्यार का गीत है” ने लोगों को भाव-विभोर कर दिया, कार्यक्रम में बिलासपुर एजुकेशन वेलफेयर, लायंस क्लब, बज़्म-ए-अदब, मुस्लिम जमात, विकलांग चेतना परिषद सहित कई संगठनों की ऐतिहासिक भागीदारी ने इसे जनआंदोलन का रूप दे दिया, वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह सिर्फ कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत नींव है और हर नागरिक को इससे जुड़ना चाहिए, अंत में संदेश साफ था—अगर चेतना जाग गई तो अपराध खुद-ब-खुद खत्म होंगे और समाज खुद अपनी सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत बन जाएगा।
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