रुद्रपुर,06 अपै्रल (आरएनएस)। रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए गेहूं खरीद को यूनिफॉर्म स्पेसिफिकेशन जारी कर दिए गए हैं। नए मानकों के अनुसार भारतीय गेहूं की विभिन्न किस्मों ट्रिटिकम वल्गारे, टी. कॉम्पैक्टम, टी. स्पैरोकोकम, टी. एस्टिवम और टी. डाइकोकम के दाने पूरी तरह सूखे, परिपक्व और साफ होने चाहिए। दानों का रंग, आकार और चमक प्राकृतिक होनी चाहिए तथा उनमें किसी प्रकार की दुर्गंध या हानिकारक तत्व नहीं होने चाहिए।निर्देशों के मुताबिक गेहूं में जहरीले बीज, रंग मिलावट या अन्य हानिकारक पदार्थ बिल्कुल नहीं होने चाहिए। विशेष रूप से मैक्सिकन आर्जीमोन और खेसारी (लाथिरस सैटिवस) का मिश्रण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। अनाज का व्यापार योग्य और अच्छी स्थिति में होना अनिवार्य किया गया है। मानकों के अनुसार विदेशी पदार्थ अधिकतम 0.75 प्रतिशत, अन्य खाद्यान्न 2 प्रतिशत, क्षतिग्रस्त दाने 2 प्रतिशत, आंशिक क्षतिग्रस्त दाने 4 प्रतिशत, सिकुड़े या टूटे दाने 6 प्रतिशत तथा कीटग्रस्त दाने 1 प्रतिशत तक ही स्वीकार्य होंगे। नमी की अधिकतम सीमा 12 प्रतिशत तय की गई है। 12 से 14 प्रतिशत नमी होने पर कटौती की जाएगी, जबकि 14 प्रतिशत से अधिक नमी वाले गेहूं को सीधे अस्वीकार कर दिया जाएगा। विदेशी पदार्थों में जहरीले बीज 0.4 प्रतिशत से अधिक नहीं होंगे, जिसमें धतूरा 0.025 प्रतिशत और अकरा 0.2 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। क्षतिग्रस्त दानों में एरगॉट की मात्रा 0.05 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। कीटग्रस्त दानों की गणना संख्या के आधार पर होगी और 1 प्रतिशत से अधिक होने पर स्टॉक खारिज कर दिया जाएगा। जीवित कीट मिलने पर प्रति क्विंटल 2 रुपये की दर से फ्यूमिगेशन शुल्क भी लिया जाएगा। सभी परीक्षण भारतीय मानक ब्यूरो के तय मानकों के अनुसार किए जाएंगे। डी आरएमओ अशोक कुमार का मानना है कि इन सख्त नियमों से गेहूं की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी और किसानों व खरीद एजेंसियों के बीच पारदर्शिता बढ़ेगी।
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