मदुरै 07 April, (Rns): तमिलनाडु के बहुचर्चित सथानकुलम कस्टोडियल किलिंग मामले में छह साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार इंसाफ की जीत हुई है। सत्ता और वर्दी के नशे में चूर होकर एक व्यापारी और उसके बेटे को बेरहमी से मौत के घाट उतारने वाले 9 पुलिसकर्मियों को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। फर्स्ट एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज जी. मुथुकुमारन की अदालत ने पुलिस की इस बर्बरता को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभ) अपराध की श्रेणी में रखते हुए यह ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है।
लॉकडाउन का बहाना और पुलिस थाने में बर्बरता की इंतहा
यह रूह कंपा देने वाली घटना तूतीकोरिन जिले के सथानकुलम की है। कोरोना काल के दौरान 19 जून 2020 को पुलिस ने व्यापारी पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेन्निक्स को सिर्फ इसलिए हिरासत में ले लिया था क्योंकि उन्होंने अपनी मोबाइल एक्सेसरी की दुकान निर्धारित समय के बाद भी खुली रखी थी। नियम तोड़ने के इस छोटे से आरोप में पुलिस ने दोनों के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। उन्हें पूरी रात थाने में बुरी तरह प्रताड़ित किया गया। लगातार और बर्बर मारपीट के कारण दोनों को ब्लंट फोर्स ट्रॉमा और भारी रक्तस्राव जैसी जानलेवा चोटें आईं, जिसके चलते दोनों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
देश भर में उठा था आक्रोश, सीबीआई ने खोली साजिश की पोल
पिता-पुत्र की इस दर्दनाक कस्टोडियल मौत के बाद पूरे देश में भूचाल आ गया था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। मामले की गंभीरता और जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। सीबीआई ने अपनी गहन जांच में पाया कि पुलिस की यह क्रूरता कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि यह पूरी तरह से पूर्व नियोजित थी और जानबूझकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया। जांच एजेंसी ने अदालत में पुख्ता सबूतों के साथ दलील दी कि इन दोषियों को अधिकतम सजा मिलनी चाहिए, जिसे अदालत ने पूरी तरह से स्वीकार कर लिया।
एक आरोपी की हो चुकी है मौत, फैसले से मिला कड़ा संदेश
अदालत ने जिन नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा का हकदार माना है, उनमें इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर पी. रघु गणेश और के. बालकृष्णन के साथ-साथ हेड कांस्टेबल एस. मुरुगन, ए. समदुरई और कांस्टेबल एम. मुथुराज, एस. चेल्लादुरई, एक्स. थॉमस फ्रांसिस व एस. वेलुमुथु शामिल हैं। इस पूरे जघन्य कांड में एक दसवां आरोपी स्पेशल सब-इंस्पेक्टर पॉलदुरई भी था, लेकिन ट्रायल के दौरान ही संक्रमण से उसकी मौत हो गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं था, बल्कि रक्षकों द्वारा अपनी शक्ति का क्रूरतम दुरुपयोग था। इस फैसले ने पूरे देश में यह कड़ा संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह वर्दी पहनने वाला ही क्यों न हो।

