नदिया 7 अप्रैल (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य में मतुआ,राजबंशी और अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाकर एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट से नाम हटाए जा रहे थे। चकदा में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि टीएमसी उन लोगों के साथ खड़ी रहेगी जिनके नाम विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन के बाद मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। सीएम ममता ने सवाल उठाते हुए कहा कि, यह भेदभाव क्यों? आप मतुआ, राजबंशी और अल्पसंख्यकों को अलग-थलग कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि लोग इसे नहीं समझते? मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि मुर्शिदाबाद, माल्दा और उत्तर दिनाजपुर जैसे महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक आबादी वाले जिलों में, मतदाताओं की सूची से नामों को सिर के जूं की तरह चुनकर हटा दिया गया। ममता बनर्जी ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट में उनके हस्तक्षेप के बाद, ‘विचाराधीनÓ लगभग 60 लाख मामलों में से लगभग 32 लाख नाम बहाल कर दिए गए हैं। साथ ही ममता बनर्जी ने चुनाव से पहले हटाए गए मतदाता नामों को बहाल करने के लिए ट्रिब्यूनल में जाने का वादा किया । उन्होंने विस्थापित महिलाओं सहित वास्तविक मतदाताओं के बहिष्कार पर चिंता व्यक्त की व मतुआ के गढ़ में ठाकुर परिवार के भीतर विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ चेतावनी दी। नाम हटाए जाने के संबंध में स्पष्टता की कमी पर सवाल उठाते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि कई वास्तविक मतदाता प्रभावित हुए होंगे, जिनमें वे महिलाएं भी शामिल हैं जिनके नाम विवाह के बाद स्थान परिवर्तन के कारण हटा दिए गए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे नामों को बहाल किया जाना चाहिए और मतदान के अधिकार से वंचित करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ चेतावनी दी।
उन्होंने कड़ा राजनीतिक रुख अपनाते हुए मतुआ समुदाय के अधिकारों को कमजोर करने के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि ऐसे किसी भी कदम का कड़ा विरोध किया जाएगा। किसी व्यक्ति का नाम लिए बिना, उन्होंने प्रभावशाली ठाकुर परिवार में फूट डालने के प्रयासों के खिलाफ भी चेतावनी दी और कहा कि ऐसी रणनीति से कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा। प्रतिद्वंद्वी दलों से एक ही परिवार के सदस्यों के बीच चल रहे तीव्र चुनावी मुकाबले के बीच यह मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। खैरामारी स्टेडियम में आयोजित रैली ने क्षेत्र के कई निर्वाचन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण चुनावी अभियान को गति दी। ममता बनर्जी ने दोहराया कि उनकी पार्टी मतदाताओं की शिकायतों के निवारण और चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्ष भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कदम उठाएगी, साथ ही मतदाता सूची प्रबंधन में किसी भी कथित अनियमितता का कड़ा विरोध भी करेगी।
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