पटना ,09 अपै्रल (आरएनएस)। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) प्रमुख नीतीश कुमार कल यानी 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद की शपथ लेंगे। इसी के साथ उनका बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में करीब 2 दशक लंबा कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है।
सूत्रों के हवाले से बताया है कि वे 14 अप्रैल को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसी दिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का विधायक दल अगले मुख्यमंत्री का चयन करने के लिए बैठक करेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, नीतीश ने कथित तौर पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से कहा है कि मुख्यमंत्री का पद खाली नहीं रह सकता। सूत्रों ने बताया है कि नीतीश चाहते हैं कि उनके उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद संभालें और उन्होंने पार्टी नेतृत्व को अपनी प्राथमिकता से अवगत करा दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सम्राट का शपथ ग्रहण समारोह 15 अप्रैल को हो सकता है।
नीतीश ने 17 मार्च को एनडीए के 4 अन्य उम्मीदवारों के साथ राज्यसभा चुनाव जीता था। इसके बाद 30 मार्च को उन्होंने बिहार विधान परिषद के सदस्य पद से इस्तीफा दिया था। इसी के साथ ये लगभग तय हो गया था कि बिहार का मुख्यमंत्री पद अब भाजपा को मिलने जा रहा है। हालांकि, अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। नीतीश आज दिल्ली रवाना होंगे और कल राज्यसभा सांसद पद की शपथ लेंगे।
खबरें हैं कि नीतीश के बेटे निशांत कुमार को बिहार की नई सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। नीतीश के राज्यसभा जाने का फैसला लेने के बाद 8 मार्च को निशांत ने जेडीयू की सदस्यता ली थी। निशांत अभी तक सक्रिय राजनीति से दूर रहे हैं और ज्यादातर समय सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों से दूरी बनाए रखते हैं। खबरें हैं कि वे पार्टी को मजबूत करने के लिए यात्रा निकालने की योजना बना रहे हैं।
अगले मुख्यमंत्री के लिए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल के नाम आगे हैं। चौधरी गृह मंत्री हैं और बिहार में प्रभावशाली भाजपा नेताओं में से एक हैं। वह बिहार भाजपा अध्यक्ष भी रहे हैं। नित्यानंद राय केंद्र सरकार में कनिष्ठ गृह मंत्री हैं। वे बिहार भाजपा के प्रमुख के साथ 3 बार सांसद और विधायक भी रहे। जायसवाल विधान परिषद के सदस्य रहे हैं और बिहार भाजपा प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
नीतीश 1985 में एक विधायक के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहने के बाद 2005 में पहली बार एनडीए के सहयोगी के रूप में बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि, 2013, 2017, 2022 और 2024 में वह भाजपा और महागठबंधन (राजद और कांग्रेस) के बीच बारी-बारी से बदलते रहे। उन्होंने 2025 में 5वीं बार बड़ी चुनावी जीत हासिल की और रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
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