तृणमूल ने लगाया हुमायूं के साथ भाजपा के एक हजार करोड़ की डील का आरोप
एएयूपी ने लगाया साजिश का आरोप, दी दो हजार करोड़ की मानहानि की धमकी
जगदीश यादव
कोलकाता। बंगाल में बड़े तेज तप रहे सियासी पारा के बीच सियासी गर्मी इस कदर तब अधिक हो गई जब शोसल मीडिया में हुमायूं कबीर के कथित वायरल वीडियों आया। महानगर कोलकाता हो या फिर ग्राम बांग्ला तमाम जगहों पर उक्त वीडियों को लेकर बहस का दौर शुरु हो गया है। ऐसे में आज तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने पूर्व विधायक हुमायूं कबीर और उनकी नई बनी ‘आम आदमी उन्नयन पार्टीÓ (एएयूपी) के साथ 1 हजार करोड़ रुपए की डील की है। इस डील का मकसद पश्चिम बंगाल की उन विधानसभा सीटों पर अल्पसंख्यक वोटों को बांटना है, जहां एएयूपी के उम्मीदवार विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं। एक संवाददाता सम्मेलन में मंत्री फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास और तृणमूल के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने एक ऑडियो क्लिप जारी की, जिसमें कथित तौर पर कबीर को किसी अज्ञात व्यक्ति से इसी तरह की बातचीत करते हुए सुना गया। हालांकि, समाचार पत्र इस ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है। तीनों नेताओं ने यह ऑडियो क्लिप तब जारी करने का फैसला किया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हल्दिया में एक विशाल चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर कबीर को उस अज्ञात व्यक्ति को यह भरोसा दिलाते हुए सुना गया कि यदि भाजपा इस बार ज्यादातर हिंदू वोट हासिल करने में सफल हो जाती है, तो वह मुस्लिम मतदाताओं को बांटने में अहम भूमिका निभाएंगे और वह ऐसा राज्य से तृणमूल को सत्ता से बाहर करने के लिए करेंगे।
कबीर को एक अनजान व्यक्ति को यह भरोसा दिलाते हुए भी सुना गया कि अगर इस बार पश्चिम बंगाल में भाजपा सत्ता में आती है, तो वह और उनकी पार्टी नए मुख्यमंत्री को 100 प्रतिशत समर्थन देंगे। ऑडियो क्लिप में उन्हें यह दावा करते हुए भी सुना गया कि वह विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ नियमित संपर्क में हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हकीम ने कहा कि कबीर को अल्पसंख्यक मतदाताओं को मूर्ख समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह पैसों के लिए अपनी अंतरात्मा भाजपा को बेच सकते हैं। लेकिन आम अल्पसंख्यक मतदाता ऐसा कभी नहीं करेंगे। इस पूरे मामले पर कबीर की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। टीएमसी ने इसे साजिश करार देते हुए कहा कि कबीर मुस्लिम वोटरों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं मामले पर हुमायूं कबीर ने साफ कहा कि यह वीडियो फेक है, एआई टेक्नोलॉजी से बनाया गया है और टीएमसी जानबूझकर उन्हें बदनाम कर रही है। हुमायूं कबीर ने चेतावनी दी कि अगर वीडियो की सच्चाई नहीं साबित हुई तो 2000 करोड़ का मानहानि का मुकदमा कर देंगे। बहरहाल जो भी हो हम न तो वीडियों को फर्जी कह रहे हैं और न ही शुद्ध खरा। वैसे सच तो यह है कि, वीडिया विवाद अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर गरमा गया है और देश भर में हलचल पच गई है।
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