लखनऊ 10 अप्रैल (आरएनएस )प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने उद्यान निदेशालय, लखनऊ में आयोजित शीतगृहों की सुदृढ़ता एवं संचालन विषयक एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। कार्यशाला के दौरान शीतगृहों में आलू भंडारण, भंडारण उपरांत प्रबंधन, मशीनरी सुदृढ़ीकरण तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश में शीतगृहों का सुरक्षित और वैज्ञानिक संचालन अत्यंत आवश्यक है, जिससे किसानों की उपज को सुरक्षित रखा जा सके और किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना को न्यूनतम किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों और शीतगृह संचालकों को निर्देश दिए कि भंडारण व्यवस्था में निर्धारित सभी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा समय-समय पर नियमित निरीक्षण और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएं।मंत्री ने कहा कि पूर्व में हुई घटनाओं से सबक लेते हुए शीतगृहों में गैस प्रबंधन, वेंटिलेशन सिस्टम और मशीनरी की नियमित जांच को अनिवार्य बनाया जाए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि भंडारण व्यवस्था अधिक सुरक्षित, प्रभावी और विश्वसनीय बन सके। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से भंडारण करने से किसानों की फसलों की गुणवत्ता बनी रहती है और उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलती है।कार्यशाला के दौरान अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश आलू उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है, जहां देश के कुल उत्पादन का 30 प्रतिशत से अधिक आलू उत्पादित होता है। प्रदेश में वर्तमान समय में 2363 से अधिक निजी शीतगृह संचालित हो रहे हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता लगभग 202.99 लाख मीट्रिक टन है। वर्तमान सत्र में लगभग 172.12 लाख मीट्रिक टन आलू का भंडारण किया जा चुका है, जो कुल क्षमता का 84.79 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की तुलना में भंडारण क्षमता और उसके उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो प्रदेश की कृषि व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।कार्यशाला के दौरान शीतगृहों के आधुनिकीकरण, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने तथा सौर ऊर्जा आधारित प्रणालियों के उपयोग पर भी विशेष चर्चा की गई। इसके साथ ही संचालकों को सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे अनुदान, तकनीकी सहयोग और नवीन दिशानिर्देशों की जानकारी दी गई, जिससे वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी सेवाओं को और बेहतर बना सकें।मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने उद्यान विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि शीतगृह संचालकों और कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तथा लाइसेंसिंग और संचालन से जुड़े सभी मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि विभाग और संचालकों के संयुक्त प्रयासों से ही प्रदेश में सुरक्षित और प्रभावी भंडारण व्यवस्था स्थापित की जा सकती है, जिससे किसानों की उपज सुरक्षित रहेगी और उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी।
कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव बी. एल. मीणा, निदेशक उद्यान बी. पी. राम, संयुक्त निदेशक सहित विभिन्न तकनीकी विशेषज्ञों, कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों तथा विभागीय अधिकारियों ने भाग लिया और शीतगृहों की सुरक्षा एवं दक्षता बढ़ाने से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
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