लखनऊ ,11 अपै्रल (आरएनएस)। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सामाजिक परिवर्तन के पितामह के रूप में प्रसिद्ध महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि बहुजन समाज में अति-पिछड़े वर्ग में जन्मे महात्मा ज्योतिबा फुले को उनकी जयंती पर उनकी ओर से तथा बहुजन समाज पार्टी की ओर से शत-शत नमन व श्रद्धा सुमन अर्पित किए जाते हैं।उन्होंने कहा कि विशेषकर शिक्षा के माध्यम से स्त्री-शक्ति को आगे बढ़ाने में महात्मा ज्योतिबा फुले तथा उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। महात्मा ज्योतिबा फुले के शब्दों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “विद्या बिना मति गयी, मति बिना नीति गयी, नीति बिना गति गयी, गति बिना वित्त गया, वित्त बिना शूद्र हताश हुए और गुलाम बनकर रह गये।” उन्होंने कहा कि यह सब शिक्षा के अभाव का परिणाम था और इसी से प्रेरित होकर आगे चलकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने शिक्षा की ओर विशेष ध्यान दिया।उन्होंने कहा कि उन्नीसवीं सदी के मध्य में दलितों व शोषितों की मुक्ति के लिए महात्मा ज्योतिबा फुले के प्रभावी प्रयासों के कारण न केवल पुणे, बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सामाजिक परिवर्तन की नई चेतना जागृत हुई और विशेष रूप से नारी मुक्ति व सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कार्य प्रारम्भ हुआ। उन्होंने कहा कि उनके इन संघर्षों और योगदान के लिए जितनी भी सराहना की जाए, वह कम है।मायावती ने कहा कि ऐसे अति-पिछड़े समाज के महापुरुष की स्मृति और सम्मान में उनकी सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में अनेक कार्य किए गए, जिनमें अमरोहा को ज्योतिबा फुले नगर नाम से नया जनपद बनाना भी शामिल था, किन्तु बाद में समाजवादी पार्टी की सरकार ने संकीर्ण राजनीति और जातिगत द्वेष के कारण इसका नाम बदल दिया।उन्होंने कहा कि उनकी सरकार द्वारा कासगंज को कांशीराम नगर, कानपुर देहात को रमाबाई नगर, संभल को भीमनगर, शामली को प्रबुद्ध नगर तथा हापुड़ को पंचशील नगर के नाम से नए जनपद बनाए गए थे। बाद में समाजवादी पार्टी की सरकार ने जनपपद तो बनाए रखा, किन्तु इन सभी जनपदों के नाम बदल दिए, जिसे उन्होंने अत्यंत दुखद बताया।
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