बरसांवा गांव में चल रही है सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा
सुल्तानपुर,11 अपै्रल (आरएनएस)। जिले के बल्दीराय तहसील क्षेत्र अंतर्गत बरसावां गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा यजमान सरस्वती शुक्ला एवं राम मनोरथ शुक्ल के निज आवास पर भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत माहौल देखने को मिला। अयोध्या धाम से पधारे कथावाचक श्याम सारथी जी महाराज ने शुकदेव जी के जन्म प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि कलयुग में श्रीमद्भागवत महापुराण कल्पवृक्ष से भी श्रेष्ठ है, जो अर्थ, धर्म, काम के साथ-साथ भक्ति और मुक्ति प्रदान कर जीव को परम पद तक पहुंचाती है। यह केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप है, जिसके प्रत्येक अक्षर में ईश्वर का वास है। महाराज ने बताया कि भागवत कथा का श्रवण दान, व्रत और तीर्थ से भी बढ़कर है। इसके ध्यानपूर्वक श्रवण और आत्मसात करने से धुंधकारी जैसे महापापी का भी उद्धार संभव है। उन्होंने कहा कि मनुष्य से गलती होना स्वाभाविक है, लेकिन समय रहते सुधार न करना उसे पाप की श्रेणी में ले जाता है। कथा के दौरान राजा परीक्षित को मिले श्राप का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि जब उन्हें सातवें दिन सर्पदंश से मृत्यु का ज्ञान हुआ, तो उन्होंने मोह त्यागकर भगवान की शरण ग्रहण की। शुकदेव जी से भागवत कथा का श्रवण ही उनके उद्धार का माध्यम बना। उन्होंने यह भी कहा कि केवल कथा सुनना पर्याप्त नहीं, बल्कि श्रोता के भीतर जिज्ञासा और श्रद्धा होना आवश्यक है। परमात्मा अदृश्य होते हुए भी प्रत्येक जीव में विद्यमान है। कथा के समापन पर भागवत भगवान एवं व्यास पीठ की विधिवत आरती उतारी गई तथा श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
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