मुंबई ,12 अपै्रल ,। आज के समय में ‘जेन-जीÓ (त्रद्गठ्र्ठ ं) युवा सिर्फ ऑफिस में बैठकर काम ही नहीं करते, बल्कि अपने बॉस को उसी के बनाए नियमों से सबक सिखाना भी बखूबी जानते हैं। अक्सर कंपनियों में उम्मीद की जाती है कि कर्मचारी ऑफिस के बाद भी काम के लिए उपलब्ध रहें, लेकिन एक युवा ने कंपनी के नियमों का ऐसा अक्षरश: पालन किया कि पूरे मैनेजमेंट का सिस्टम ही सवालों के घेरे में आ गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्सÓ (ङ्ग) पर मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट पारस गंगवाल द्वारा शेयर किया गया यह मजेदार किस्सा अब तेजी से वायरल हो रहा है।
पहले ही दिन सुनाया गया था ‘नो वर्क फ्रॉम होमÓ का सख्त फरमान
एक्स पर शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, रोहित नाम के एक जेन-जी कर्मचारी ने हाल ही में एक नई कंपनी में नौकरी शुरू की थी। जॉइनिंग के पहले ही दिन मैनेजमेंट ने एक सख्त फरमान सुनाते हुए साफ कर दिया था कि किसी भी परिस्थिति में किसी भी कर्मचारी को ‘वर्क फ्रॉम होमÓ (घर से काम) नहीं मिलेगा। रोहित ने इस आदेश पर न तो कोई बहस की और न ही कोई विरोध दर्ज कराया। वह हर दिन बिल्कुल समय पर ऑफिस आता, पूरी ईमानदारी से अपना काम खत्म करता और शिफ्ट पूरी होते ही बिना कोई सवाल किए अपना सिस्टम लॉग ऑफ करके घर चला जाता। सब कुछ बिल्कुल शांति और नियमों के हिसाब से चल रहा था, लेकिन एक रात कुछ ऐसा हुआ जिसने ऑफिस के नियमों की ही पोल खोल दी।
रात 8 बजे आया मैसेज, मैनेजर ने अगले दिन लगाई क्लास
ऑफिस के नियमों में असल पेंच तब फंसा जब एक शाम करीब 8 बजे रोहित को एक जरूरी क्लाइंट का मैसेज आया। चूंकि शिफ्ट खत्म हो चुकी थी, इसलिए रोहित ने उस मैसेज का जवाब न देने का विकल्प चुना। अगले दिन जब वह ऑफिस पहुंचा, तो मैनेजर ने उस मैसेज को अनदेखा करने पर उसे तलब कर लिया और तीखे सवाल किए। मैनेजर को उम्मीद थी कि रोहित कोई बहाना बनाएगा, लेकिन इस युवा कर्मचारी का जवाब इतना तार्किक था कि मैनेजर के भी पसीने छूट गए।
‘सर, घर से रिप्लाई करता तो ङ्खस्न॥ हो जाता, जो आपने बैन कर रखा हैÓ
मैनेजर के सवालों का रोहित ने बेहद शांत, सीधे और सधे हुए लहजे में जवाब दिया। रोहित ने कहा, “सर, मुझे लगा कि ऑफिस के घंटों के बाद घर से क्लाइंट को जवाब देना ‘वर्क फ्रॉम होमÓ (ङ्खस्न॥) की श्रेणी में आएगा, जिसे मैनेजमेंट ने पूरी तरह से बैन कर रखा है।” रोहित का यह अप्रत्याशित जवाब सुनकर मैनेजर के पास कहने को कुछ नहीं बचा। रोहित ने कोई बगावत नहीं की थी, बल्कि उसने मैनेजमेंट के ही बनाए नियमों को पूरी ईमानदारी से माना था। इस घटना ने कॉर्पोरेट जगत के उस दोहरे रवैये को उजागर कर दिया है, जहां ऑफिस टाइमिंग को लेकर तो सख्त नियम थोपे जाते हैं, लेकिन शिफ्ट के बाद भी कर्मचारियों से 24 घंटे काम के लिए उपलब्ध रहने की उम्मीद की जाती है। जेन-जी के इस शांत तरीके से विरोध जताने के अंदाज की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है।
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