नई दिल्ली ,13 अपै्रल ,। ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के आर्थिक प्रभाव अब धीरे-धीरे वैश्विक स्तर पर दिखने लगे हैं। इस बीच विश्व बैंक के अध्यक्ष ्रद्भड्ड4 क्चड्डठ्ठद्दड्ड ने दुनिया को आगाह किया है कि मौजूदा सीजफायर अगर टूटता है, तो इसके नतीजे बेहद गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भले ही युद्ध फिलहाल थम जाए, लेकिन इसका असर लंबे समय तक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बना रहेगा।
ग्रोथ पर पड़ेगा असर
अजय बंगा के मुताबिक, यदि सीजफायर कायम रहता है तो भी वैश्विक आर्थिक विकास दर में 0.3त्न से 0.4त्न तक गिरावट संभव है। वहीं, अगर हालात बिगड़ते हैं और संघर्ष दोबारा तेज होता है, तो यह गिरावट 1त्न तक पहुंच सकती है। इसका सीधा असर व्यापार, ऊर्जा बाजार और वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर पड़ेगा।
महंगाई का दबाव बढ़ेगा
इस संकट का असर महंगाई पर भी साफ दिख सकता है। अनुमान के मुताबिक, सीजफायर जारी रहने की स्थिति में महंगाई 0.2त्न से 0.3त्न तक बढ़ सकती है। लेकिन अगर संघर्ष लंबा खिंचता है, तो यह बढ़कर 0.9त्न तक पहुंच सकती है। खासकर विकासशील देशों के लिए यह स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण होगी, जहां महंगाई दर 6.7त्न तक जा सकती है।
ऊर्जा संकट से बढ़ेंगी चुनौतियां
ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर देशों के लिए यह संकट और गंभीर हो सकता है। विश्व बैंक पहले ही ऐसे देशों के साथ संवाद कर रहा है, जो ऊर्जा आयात पर अधिक निर्भर हैं। छोटे द्वीपीय देशों के लिए स्थिति और कठिन हो सकती है, जिसके मद्देनजर इमरजेंसी फंडिंग की तैयारी की जा रही है।
सरकारों को सख्त सलाह
अजय बंगा ने सरकारों को चेताया कि वे अल्पकालिक राहत देने वाली लेकिन दीर्घकाल में अस्थिर ऊर्जा सब्सिडी से बचें। उन्होंने जोर देकर कहा कि देशों को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लानी चाहिए, ताकि भविष्य में आर्थिक अस्थिरता से बचा जा सके।
नाइजीरिया मॉडल का जिक्र
बंगा ने नाइजीरिया का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 20 अरब डॉलर की रिफाइनरी परियोजना ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है। इससे न केवल आत्मनिर्भरता बढ़ी है, बल्कि पड़ोसी देशों को ईंधन निर्यात करने की क्षमता भी विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि परमाणु, पवन, सौर और जलविद्युत जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निवेश बढ़ाना समय की जरूरत है, वरना दुनिया फिर पारंपरिक ईंधन पर निर्भर होकर आर्थिक और पर्यावरणीय जोखिम बढ़ा सकती है।
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