प्रयागराज 13 अप्रैल (आरएनएस)। शिक्षा ही वह रोशनी है, जिससे एक समृद्ध, सक्षम और विकसित भारत गढ़ा जा सकता है। एक सरकारी संस्थान होने के बावजूद नवोदय विद्यालय अपनी उत्कृष्ट शिक्षा व बेहतर परीक्षा परिणामों की वजह से आज शीर्ष पर है। राजनीति, प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, शैक्षणिक, सैन्य सेवाओं से लेकर विभिन्न प्रोफेशनल सेवाओं, बिजनेस और सामाजिक सेवाओं में नवोदयन्स पूरे भारत ही नहीं वरन पूरी दुनिया में पहचान बना रहे हैं। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की प्रेरणा से 13 अप्रैल, 1986 को दो नवोदय विद्यालयों से आरंभ हुआ यह सफर आज 661 तक पहुँच चुका है। नवोदय अपनी स्थापना के 40 साल पूरा कर रहा है। देश भर में नवोदय विद्यालय के 17 लाख से अधिक पुरा विद्यार्थियों का नेटवर्क समाज को नई दिशा देने के लिए तत्पर है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्Ó एवं ‘शिक्षार्थ आइए, सेवार्थ जाइएÓ की भावना से प्रेरित नवोदय में जाति, संप्रदाय, क्षेत्र से परे सिर्फ राष्ट्र प्रेम की भावना है। उक्त उद्गार नवोदय विद्यालय, आज़मगढ़ के पुरा छात्र एवं पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने ‘नवोदय स्थापना दिवसÓ पर व्यक्त किये।
एक प्रशासक के साथ-साथ वरिष्ठ साहित्यकार और ब्लॉगर के रूप में भी ख्याति प्राप्त पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि, अधिकतर ग्रामीण पृष्ठभूमि के नवोदय विद्यार्थी आज जिन ऊँचाइयों पर हैं, उसका श्रेय नवोदय की नव उदय की उस भावना को जाता है, जहाँ जात-पात, धर्म, अमीर-गरीब, शहरी-ग्रामीण जैसे तमाम विभेद भूलकर सब सिर्फ एक सकारात्मक सोच के साथ नए पथ पर अग्रसर होते हैं। नवोदयी भावना एक ऐसा अनमोल रिश्ता है, जो हर नवोदयन के दिल में खास जगह बनाए हुए है।
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