रायपुर 14 अप्रैल (आरएनएस) तिल्दा विकासखंड के ग्राम पंचायत बेमता में एक ऐसा बदलाव हुआ जिसने साबित कर दिया कि इंतजार लंबा हो सकता है, लेकिन अगर उम्मीद जिंदा रहे तो जिंदगी जरूर बदलती है, कभी लकड़ी और फटे कपड़ों से बने अस्थायी ढांचे में जिंदगी गुजारने वाली श्रीमती बृहस्पति निषाद आज अपने पक्के घर की चौखट पर खड़ी हैं और यह बदलाव संभव हुआ प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के सहारे, एक समय ऐसा था जब बृहस्पति अपने पति बहादुर निषाद और तीन बच्चों के साथ ऐसे घर में रहती थीं जिसे घर कहना भी मुश्किल था, हर बारिश में छत टपकती थी, हर हवा में दीवारें हिलती थीं और हर मौसम उनके लिए एक नई चुनौती बनकर आता था, गांव में जब भी किसी का पक्का घर बनता तो वह चुपचाप उसे देखतीं और मन ही मन अपने घर का सपना बुनतीं, कई बार पंचायत के चक्कर लगाए लेकिन हर बार एक ही जवाब मिला कि 2011 की जनगणना सूची में नाम नहीं है, धीरे-धीरे उम्मीद कमजोर पड़ने लगी थी लेकिन 2018 में जब “आवास प्लस” सूची में नाम जुड़ने की खबर मिली तो उम्मीद की लौ फिर जल उठी, इसके बाद भी इंतजार खत्म नहीं हुआ और वह लगातार पंचायत जाकर अपने घर की स्थिति जानती रहीं, आखिरकार 2024-25 में वह दिन आया जब पंचायत सचिव ने उनके घर पहुंचकर आवास स्वीकृत होने की जानकारी दी और एक हफ्ते के भीतर पहली किस्त उनके खाते में पहुंच गई, यहीं से उनकी जिंदगी ने करवट ली, निरीक्षण के लिए आई अधिकारी ने उन्हें सलाह दी कि जितनी राशि है उसी में छोटा लेकिन मजबूत घर बनाएं और कर्ज से बचें, इस सलाह को उन्होंने गंभीरता से लिया और अपने पति के साथ मिलकर खुद मजदूरी करते हुए घर बनाना शुरू किया, ईंट उठाना, रेत डालना, दीवार खड़ी करना—यह सिर्फ निर्माण नहीं था बल्कि एक नई जिंदगी की नींव थी, हर किस्त के साथ घर खड़ा होता गया और हर दीवार के साथ उनका आत्मविश्वास भी मजबूत होता गया, आज उनका घर छोटा जरूर है लेकिन सुरक्षित है, अब उन्हें हर मौसम से डरकर रात नहीं बितानी पड़ती, अब वे अपने ही गांव में रहकर मजदूरी करते हैं और दूसरों के घर बनते देख अपने संघर्ष की कहानी याद करते हैं, बृहस्पति कहती हैं कि अब घर लौटने पर जो सुकून मिलता है वह पहले कभी नहीं मिला, यह सिर्फ एक छत नहीं बल्कि सम्मान, सुरक्षा और नए भविष्य की शुरुआत है, यह कहानी बताती है कि योजनाएं तभी सफल होती हैं जब वे सही हाथों तक पहुंचती हैं और एक छोटे से मौके से भी पूरी जिंदगी बदल सकती है।
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