कोरबा, 16 अप्रैल 2026 (आरएनएस) —गरीबों के आशियाने के लिए आई सरकारी राशि को अपने खाते में खींच लेने वाले एक शातिर दिमाग का पर्दाफाश करते हुए EOW-ACB रायपुर ने लंबे समय से फरार आरोपी को दबोच लिया, आरोपी गौरव शुक्ला पिता सुधीर शुक्ला उम्र 47 वर्ष निवासी नंदबाग रूमगरा जिला कोरबा, जो बैंक ऑफ इंडिया कोरबा शाखा में कियोस्क संचालक के रूप में काम करता था, उसने सिस्टम की खामियों और भरोसे का ऐसा खेल खेला कि गरीबों के इंदिरा आवास योजना के ₹79 लाख रुपये अपने कब्जे में कर लिए, मामला वर्ष 2010-11 में आई आवास योजना की राशि से जुड़ा है जिसे आरोपी ने वर्ष 2017 में चालाकी से अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया, जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने निष्क्रिय खातों को बैंक कर्मचारियों की स्टाफ आईडी का दुरुपयोग कर सक्रिय किया और फिर हितग्राहियों के आधार कार्ड को अपने, अपने पिता, माता, पत्नी और बेटे के आधार नंबर से लिंक कर दिया, इसके बाद AEPS सिस्टम के जरिए अपने बायोमेट्रिक से पैसा सीधे अपने खातों में खींचता रहा, आरोपी ने Finacle सॉफ्टवेयर की खामियों जैसे आधार सत्यापन के बिना ट्रांजेक्शन और ऑटो लॉगआउट की कमी का फायदा उठाया और बैंक सिस्टम का दुरुपयोग करते हुए लंबे समय से बंद पड़े खातों में छेड़छाड़ कर डाली, जांच में यह भी सामने आया कि कुल 10 स्टाफ यूजर आईडी के जरिए 620 बार आधार सीडिंग की गई जिसमें अधिकांश बिना सत्यापन के एंट्री की गईं, इस पूरे घोटाले में आरोपी ने भोले-भाले ग्रामीणों के भरोसे का फायदा उठाया और उनके हक पर सीधा डाका डाला, पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 421, 409, 120(B) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7(सी), 13(1)(ए) के तहत मामला दर्ज किया है, माननीय विशेष न्यायालय कोरबा ने आरोपी को 21 अप्रैल 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है और मामले की जांच अभी भी जारी है, यह गिरफ्तारी सिर्फ एक आरोपी की नहीं बल्कि उस सिस्टम की सच्चाई उजागर करती है जहां भरोसे की आड़ में बड़ा खेल खेला गया—और संदेश साफ है, गरीबों का हक मारने वालों को आखिरकार कानून के सामने झुकना ही पड़ता है।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

