कवर्धा 18 अप्रैल (आरएनएस) फुलवारी परिसर स्थित हनुमान मंदिर को लेकर सोशल मीडिया में फैली सनसनीखेज अफवाह का सच पुलिस ने कुछ ही घंटों में उजागर कर दिया और साफ कर दिया कि भगवान हनुमान जी की मूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है, खंडित होने की खबर पूरी तरह झूठी थी, असली कहानी इससे अलग और चौंकाने वाली निकली जहां मंदिर से चांदी का मुकुट चोरी हुआ था और उसी मामले में कबीरधाम पुलिस ने FIR दर्ज होते ही महज 6 घंटे के भीतर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर मुकुट भी बरामद कर लिया, पूरा मामला थाना कोतवाली कवर्धा क्षेत्र का है जहां पुजारी के अनुसार महाशिवरात्रि के आसपास मंदिर से चांदी का मुकुट चोरी हुआ था लेकिन उस समय मामला सामने नहीं आया, जैसे ही 17 अप्रैल 2026 को जानकारी सामने आई वैसे ही अपराध क्रमांक 155/2026 के तहत धारा 303(2), 305(घ) बीएनएस में मामला दर्ज हुआ और पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह (IPS), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेन्द्र बघेल और अमित पटेल तथा एसडीओपी आशीष शुक्ला के निर्देशन में टीम ने तत्काल मोर्चा संभाल लिया, तकनीकी इनपुट और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए योगेश दुबे उर्फ मोनू दुबे उम्र 32 वर्ष निवासी उमरिया हाल राजमहल कॉलोनी कवर्धा, देवी मिश्रा उम्र 45 वर्ष निवासी राजमहल कॉलोनी कवर्धा और मनीन्द्र सोनी उम्र 46 वर्ष निवासी कचहरी पारा कवर्धा को हिरासत में लिया, पूछताछ में योगेश दुबे ने चोरी की वारदात कबूल की और बताया कि इसमें देवी मिश्रा ने उसका साथ दिया था जबकि चोरी किया गया चांदी का मुकुट मनीन्द्र सोनी नाम के सुनार को महज 1800 रुपये में बेच दिया गया, जांच में खुलासा हुआ कि सुनार ने उस मुकुट को पिघला दिया था लेकिन जब मोहल्ले में मामला फैला तो उसने उसी चांदी से नया मुकुट तैयार कर लिया जिसे पुलिस ने उसके कब्जे से बरामद कर लिया, पुलिस ने आरोपियों को घटना स्थल ले जाकर पूरे घटनाक्रम का रीक्रिएशन कराया जहां आरोपियों ने चोरी का तरीका बताया और अपने कृत्य पर शर्मिंदगी जताते हुए भगवान हनुमान जी के सामने माफी भी मांगी, तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा रहा है और मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है, पुलिस ने स्वर्ण-रजत कारोबारियों को सख्त चेतावनी दी है कि बिना वैध दस्तावेज के किसी भी कीमती वस्तु की खरीद-फरोख्त न करें वरना कड़ी कार्रवाई होगी और साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अपुष्ट खबर पर विश्वास न करें और न ही उसे फैलाएं क्योंकि एक अफवाह समाज में बड़ा तनाव पैदा कर सकती है, इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया है कि सच देर से सामने आए लेकिन कानून की नजर से कोई बच नहीं सकता और अफवाह की आग से बड़ा कोई खतरा नहीं होता।
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