० अक्षय तृतीया पर प्रशासन अलर्ट, सख्त कार्रवाई के निर्देश
सुकमा, 18 अप्रैल (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य से बाल विवाह की कुप्रथा को जड़ से समाप्त करने के लिए ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत कमर कस ली है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य को पूरी तरह बाल विवाह मुक्त बनाना है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह न केवल एक सामाजिक बुराई है, बल्कि ‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत एक गंभीर कानूनी अपराध भी है, जिसके लिए आयोजकों से लेकर विवाह कराने वाले पुरोहित तक पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
आगामी 19 मई 2026 को अक्षय तृतीया का पावन पर्व है, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। अक्सर इस तिथि पर बाल विवाह की संभावनाएं बढ़ जाती हैं, जिसे रोकने के लिए स्थानीय अधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह से न केवल बच्चों का सर्वांगीण विकास बाधित होता है, बल्कि यह कुपोषण, शिशु-मातृ मृत्यु दर और घरेलू हिंसा जैसी गंभीर समस्याओं को भी जन्म देता है, जो किसी भी स्थिति में बच्चों के हित में नहीं है।
शासन द्वारा जारी कार्ययोजना के तहत, संबंधित अधिकारियों को अपने अधीनस्थ अमले को सक्रिय करने और जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे इस गैर-कानूनी प्रथा को रोकने में सहयोग करें। बाल विवाह को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि राज्य के बच्चों का भविष्य सुरक्षित और खुशहाल बनाया जा सके।
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