लखनऊ ,18 अपै्रल (आरएनएस)। बालिका शिक्षा किसी भी सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र की सबसे मजबूत नींव होती है। इसी परिकल्पना को साकार करते हुए और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के मूल मंत्र को आत्मसात कर उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश की बेटियों के सर्वांगीण विकास एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर संकल्पित है। सामाजिक सोच, आर्थिक कमजोरी, विद्यालय की दूरी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव जैसी ऐतिहासिक बाधाओं को पार करते हुए आज प्रदेश की सरकार बालिकाओं को सुरक्षित, सर्वसुविधायुक्त और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करा रही है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की बेटियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोडऩे में समग्र शिक्षा अभियान के तहत संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। इन प्रयासों ने लाखों बेटियों के जीवन में शिक्षा का नया उजाला भरने का कार्य किया है।लोकहित और बालिका सशक्तिकरण की इसी श्रृंखला में जनपद चित्रकूट में शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाई प्रदान की गई है। जनपद में संचालित चार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का उच्चीकरण करते हुए उन्हें कक्षा 6 से 12 तक कर दिया गया है, जिससे अब इन विद्यालयों में 550 छात्राओं को पूर्णत: नि:शुल्क शिक्षा के साथ उत्कृष्ट आवासीय सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा, उत्तर प्रदेश के दिशा-निर्देशन में वर्ष 2025-26 के अंतर्गत चित्रकूट के उच्चीकृत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों—पहाड़ी एवं मऊ—में छात्रावासों की आधारभूत सुविधाओं को अभूतपूर्व रूप से सुदृढ़ किया गया है। छात्राओं के आवासीय जीवन को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए 40 डायनिंग टेबल, 40 डायनिंग बेंच, अध्ययन हेतु 200 मेज, 200 कुर्सियां तथा विश्राम के लिए 200 नए बेड की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।इसके अतिरिक्त मानिकपुर एवं अन्य विद्यालयों में छात्राओं के शारीरिक एवं मानसिक विकास को ध्यान में रखते हुए ओपन जिम उपकरण तथा लोक संगीत वाद्ययंत्रों की भी व्यवस्था की गई है। इन आधुनिक सुविधाओं से छात्राओं की दिनचर्या अधिक व्यवस्थित हुई है और बेहतर अध्ययन एवं विश्राम की सुविधाओं से उनके शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन में सकारात्मक सुधार देखा जा रहा है, जिससे वे अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पा रही हैं।उत्तर प्रदेश सरकार का उद्देश्य बेटियों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक विश्व की तकनीकी चुनौतियों के लिए भी तैयार करना है। इसी दिशा में निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप अब इन विद्यालयों की छात्राएं कंप्यूटर, डिजिटल शिक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों की प्रारंभिक जानकारी प्राप्त कर रही हैं। इन सुविधाओं से वंचित पृष्ठभूमि से आने वाली छात्राओं का आत्मविश्वास उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। एक समय था जब आर्थिक तंगी के कारण बेटियों की पढ़ाई बीच में ही रुक जाती थी, लेकिन अब सरकारी योजनाओं की पहुंच हर घर तक सुनिश्चित की जा रही है।इसी परिवर्तन की एक प्रेरक मिसाल मानसी जैसी छात्राओं की सफलता है। एक छोटे से गांव की रहने वाली मानसी, जो आर्थिक तंगी के कारण कक्षा पांच के बाद पढ़ाई छोडऩे को विवश थी, उसे शिक्षा विभाग के प्रयासों से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में प्रवेश मिला। यहां उसे न केवल नियमित शिक्षा मिली, बल्कि कंप्यूटर प्रशिक्षण, अंग्रेजी संवाद कौशल और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण भी प्राप्त हुआ। आज वही मानसी इंटरमीडिएट की टॉपर बन चुकी है और प्रशासनिक सेवा में जाकर देश की सेवा करने का सपना संजोए हुए है। उसकी सफलता ने पूरे गांव की सोच को बदलने का कार्य किया है और अब वहां के अन्य परिवार भी अपनी बेटियों को उत्साहपूर्वक विद्यालय भेज रहे हैं।प्रदेश सरकार बेटियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान के प्रति भी पूरी तरह संवेदनशील है। बालिकाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में जूडो, कराटे और ताइक्वांडो जैसे आत्मरक्षा प्रशिक्षण नियमित रूप से प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे उनके भीतर आत्मविश्वास और सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित हो रही है। इसके साथ ही स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में स्वच्छ गरिमा अभियान के माध्यम से किशोरियों को मासिक धर्म स्वच्छता, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा रहा है, जिससे उनमें आत्मसम्मान की भावना मजबूत हो रही है।उत्तर प्रदेश सरकार की दूरदर्शी नीतियों और योजनाओं के प्रभाव से आज ग्रामीण क्षेत्रों में बालिका शिक्षा की तस्वीर तेजी से बदल रही है। अब बेटियां केवल विद्यालय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिस एवं प्रशासनिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में अपना भविष्य बनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं। वास्तव में, प्रदेश में बालिका शिक्षा के उन्नयन के लिए किए जा रहे ये प्रयास केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि एक सशक्त समाज, विकसित उत्तर प्रदेश और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की मजबूत आधारशिला बनते जा रहे हैं। जब प्रदेश की हर बेटी शिक्षित और सशक्त बनेगी, तभी राष्ट्र वास्तविक अर्थों में प्रगति के शिखर को प्राप्त करेगा।
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