लखनऊ ,18 अपै्रल (आरएनएस)। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट द्वारा पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक वैज्ञानिक विधियों के प्रति दक्ष बनाने के उद्देश्य से “डीएनए एवं अन्य जैविक साक्ष्य संकलन” विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 18 अप्रैल 2026 को रिजर्व पुलिस लाइन, लखनऊ स्थित संगोष्ठी सदन में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार तथा पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अमित कुमावत के प्रभावी मार्गदर्शन में किया गया। कार्यशाला का सफल संचालन सहायक पुलिस आयुक्त (महिला अपराध/ट्रेनिंग सेल) सौम्या पाण्डेय के पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ।इस प्रशिक्षण कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से साक्ष्य संकलन, संरक्षण एवं उनके प्रभावी उपयोग के प्रति प्रशिक्षित करना था, ताकि अपराधों की विवेचना अधिक सटीक, निष्पक्ष एवं परिणामोन्मुख बनाई जा सके। कार्यक्रम में कमिश्नरेट लखनऊ के विभिन्न थाना क्षेत्रों से नामित 107 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन्हें विशेषज्ञों द्वारा व्यवहारिक एवं तकनीकी दोनों स्तरों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।प्रशिक्षण सत्र में विशेषज्ञ प्रशिक्षक के रूप में विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ की वैज्ञानिक अधिकारी प्रगति सिंह ने प्रतिभागियों को डीएनए एवं अन्य जैविक साक्ष्यों के संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घटनास्थल से प्राप्त रक्त एवं अन्य जैविक साक्ष्यों को पहले हवा में अच्छी तरह सुखाकर ही कागज के लिफाफे में सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि साक्ष्य की गुणवत्ता प्रभावित न हो। साथ ही ऐसे सभी नमूनों को 72 घंटे के भीतर विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजना अनिवार्य बताया गया, जिससे समय पर वैज्ञानिक परीक्षण सुनिश्चित हो सके।प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि प्रयोगशाला से अपेक्षित जानकारी के लिए स्पष्ट एवं सटीक प्रश्न तैयार किए जाएं तथा संबंधित अभिलेखों एवं दस्तावेजों का सुव्यवस्थित संधारण किया जाए। इस अवसर पर डीएनए साक्ष्य के महत्व, घटनास्थल से जैविक साक्ष्यों के वैज्ञानिक तरीके से संकलन, उनकी उचित पैकेजिंग, सुरक्षित संरक्षण तथा प्रयोगशाला तक सुरक्षित प्रेषण की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी गई।कार्यशाला में विभिन्न केस स्टडी एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि डीएनए एवं जैविक साक्ष्य जटिल अपराधों के अनावरण में किस प्रकार निर्णायक भूमिका निभाते हैं। प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों से भी अवगत कराया गया। साथ ही सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को घटनास्थल पर अत्यधिक सतर्कता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए गए, ताकि छोटी-छोटी लापरवाहियों से महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट होने की संभावना को रोका जा सके।कमिश्नरेट लखनऊ द्वारा अपराध नियंत्रण एवं विवेचना की गुणवत्ता को उच्च स्तर पर ले जाने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाते रहेंगे। अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रशिक्षण से पुलिस विवेचना की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा और न्यायालय में अभियोजन की सफलता दर में भी वृद्धि देखने को मिलेगी।इस प्रकार की पहल को पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक एवं परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे अपराधों के सफल अनावरण और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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